नगर कोतवाली, उत्तराखंड – 16 जनवरी 2026 को हुई एक दुखद घटना के बाद, विशेष न्यायालय पॉक्सो ने सूरज प्रकाश पोखरियाल को सात वर्षीया नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोप में 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 50 हज़ार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यदि आरोपी जुर्माना नहीं चुकाता है तो उसे अतिरिक्त छह महीने की सजा काटनी पड़ेगी। यह फैसला सिर्फ आठ महीने में ही सुनाया गया, जो पुलिस और न्यायालय की त्वरित कार्रवाई का प्रमाण है।
घटना की रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची घर के पास अकेले खेल रही थी, जब पंडिताई का काम करने वाला आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। आरोपों के मुताबिक, उसे कमरे में ले जाकर दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद बच्ची रोते हुए अपने परिजनों के पास पहुँचकर पूरी बात बताई। परिजनों ने तुरंत नगर कोतवाली पुलिस को लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर उसी दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
पुलिस के मुताबिक पीड़िता का सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया। नगर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई, जिसने साक्ष्य जुटाए। महिला उपनिरीक्षक निशा सिंह ने 2 मार्च 2026 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया, जिसके बाद मामला विशेष न्यायालय पॉक्सो में सुना गया। नगर कोतवाली के कांस्टेबल संजीव बिष्ट ने मामले की पैरवी की, और न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्क व साक्ष्यों का परीक्षण कर सूरज प्रकाश पोखरियाल को दुष्कर्म का दोषी माना।
कुंदन सिंह राणा ने बताया कि पुलिस की तेज़ विवेचना, साक्ष्य संकलन और कोर्ट में प्रभावी पैरवी के कारण यह मामला लगभग आठ महीनों में ही तय हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी से लेकर आरोप पत्र दाखिल करने तक की प्रक्रिया तेजी से पूरी हुई, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय का अनुभव हुआ। यह फैसला न केवल अपराधी के लिए सख्त सजा है, बल्कि समाज में ऐसी हिंसा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण संदेश है।
