हरीश रावत ने कांग्रेस पदों से इस्तीफा, ईडी रैड के बाद लिया बड़ा फैसला

उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय खुला है जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज सभी कांग्रेस पदों से इस्तीफा दे दिया। यह निर्णय देहरादून में उनके निजी सचिव चंदन सिंह जीना के घर पर हुए ईडी (एनर्जी डिवीजन) रैड के बाद लिया गया, जिसमें भारी मात्रा में नकदी, सोने के सिक्के और लग्जरी घड़ियां बरामद हुईं। 32 लाख रुपए नकद, 200.5 ग्राम सोने के सिक्के व चेन, तथा 12 घड़ियों के साथ, जीना और उनके परिवार के बैंक खातों में 52.16 लाख रुपए का बैलेंस भी पाया गया। कुल मिलाकर लगभग 1.28 करोड़ रुपए के मूल्य की संपत्ति जब्त व फ्रीज की गई।

इसी रैड के दौरान, 10 सितंबर को यूकेएसएसएससी (UKSSSC) के पूर्व अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक व निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक समेत कई प्रमुख व्यक्तियों के परिसर पर भी तलाशी ली गई। यह कदम 2016 के यूकेएसएसएससी वीपीडीओ एग्जाम में हुई गड़बड़ियों के बाद उठाया गया था।

ईडी के रैड के बाद, हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने बताया कि “सच्चाई का खुलासा आने वाले समय में होगा” और अपने पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के प्रति सम्मान व्यक्त किया। “जीना एक निहायती सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति हैं,” उन्होंने लिखा। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी भी आरोप का सत्यापन हो तो वह लज्जित होंगे, परंतु अभी तक उन्हें उस पर विश्वास नहीं है।

रावत ने अपने इस्तीफे के पीछे का कारण बताया कि “कांग्रेस के संघर्ष में किसी भी कमजोरी को अपनी वजह से नहीं आने देना चाहता।” उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति की कार्यकारी समिति के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य दोनों पदों से हटने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव के भारी स्टेक्स को देखते हुए, पार्टी की छवि और कार्यकुशलता को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम आवश्यक था।

इस घटना ने उत्तराखंड के चुनावी परिदृश्य को नई दिशा दी है, जबकि रावत का इस्तीफा राजनीतिक वाद-विवाद को और तीव्र बना रहा है। उनके निर्णय के बाद, कांग्रेस पार्टी को अपने नेतृत्व और कार्यकुशलता पर पुनः विचार करने की आवश्यकता महसूस हो रही है।