दून मेडिकल कॉलेज में नवजात के लिंग का विवाद: परिजनों ने लगाया ‘अदला-बदली’ का आरोप, मंत्रालय ने डीएनए टेस्ट का आदेश दिया

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल (दून अस्पताल) एक गंभीर विवाद के चलते चर्चाओं में आ गया है। यहां नवजात शिशु के लिंग के संबंध में एक परिवार ने अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर बच्चों की ‘अदला-बदली’ करने का गंभीर आरोप लगाया है।

परिजन का दावा है कि प्रसव के दौरान तैयार किए गए मेडिकल रिकॉर्ड्स में उनसे कहा गया कि उन्हें एक बेटा हुआ है, जबकि उन्हें सौंपा गया शिशु एक बेटी था। परिवार के अनुसार, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उन्हें ऑपरेशन थिएटर में प्रवेश नहीं दिया गया और न ही उन्हें नवजात को तब देखने का मौका मिला जब उसे उनके हाथों में सौंपा गया। इसी आधार पर उन्होंने अस्पताल प्रशासन और पुलिस के सामने शिकायत दर्ज कराई।

विवाद गहराते ही परिवार ने सीसीटीवी फुटेज और प्रसव रजिस्टर की तहकिकबंदी की मांगी। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने इस आरोप से इनकार किया है। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (डीएमओ) डॉ. आर.एस. बिष्ट का कहना है कि यह केवल एक एडमिनistrative गलती (administrative error) है। उनका दावा है कि इंटर्न द्वारा फॉर्म भरते समय गलती से ‘बेटा’ लिख दिया गया था, जबकि वास्तविक जानकारी के अनुसार वह एक बेटी थी, जिसे बाद में सुधारा गया था। उन्होंने सफाई दी कि बच्चे की सभी अन्य विवरणों की जानकारी परिजनों को पहले ही सही ढंग से दी जा चुकी थी।

मामला अब न्यायिक स्तर पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पूरी घटना की गहन जांच के लिए डीएनए टेस्ट कराने के निर्देश जारी किए हैं। फिलहाल, इस वाद के असली सच का पता लगने के लिए डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है। हालांकि, इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में नवजात की देखभाल, रिकॉर्ड की सटीकता और कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।