उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रविवार को एक राजनीतिक भूकंप ने सियासती गलियारों को हिला दिया जब समाज कल्याण मंत्री खजान दास के सरकारी आवास पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धावा बोल दिया। चकराता विधानसभा क्षेत्र से आए इन भाजपाइयों की अगवाई वरिष्ठ नेत्री मधु चौहान ने की, जबकि राज्य मंत्री गीताराम गौड़, प्रताप सिंह रावत, जिला अध्यक्ष प्रभाकर, उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और मूरत राम शर्मा समेत सैकड़ों कार्यकर्ता इस प्रदर्शनी में शामिल हुए।
मंत्री के बंगले पर धरना देते हुए प्रदर्शनकारियों ने “मुर्दाबाद” के जोरदार नारे लगाते हुए खजान दास पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण योजनाओं के बजट को मंजूरी देते समय 15 से 20 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन माँगा जा रहा है, तथा जनजातीय क्षेत्र चकराता में पात्र ST/SC और भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं को अनदेखा कर मंत्री जी योजनाओं का लाभ सामान्य वर्ग व कांग्रेस से जुड़े लोगों में बाँट रहे हैं।
इस हाई‑प्रोफाइल विरोध प्रदर्शन के दौरान खजान दास ने चुप नहीं रहे। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि एक मंत्री के रूप में उनके ऊपर पूरे उत्तराखंड की जिम्मेदारी है। “अगर मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार या एक पैसे के गबन का भी आरोप साबित हो जाता है, तो मैं तुरंत अपने पद से इस्तीफा ही नहीं दूंगा, बल्कि खुदकुशी भी कर लूंगा,” उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, जिससे राजनीतिक बयानबाजी और भी तेज हो गई।
पूरे घटना ने भाजपा संगठन के भीतर गुटबाजी और असंतोष को एक नए स्तर पर ला दिया है। अब सवाल यह है कि पार्टी संगठन को अपने ही मंत्री के सार्वजनिक रूप से आवास घेरने वाले नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए या कार्यकर्ताओं की शिकायतों को सुनकर मामला दबाना चाहिए। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह “अपनों का गदर” भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है, और यह देखना रोचक होगा कि पार्टी इसे कैसे सुलझाती है।
