उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी क्षेत्र में स्थित कालाढूंगी के विजयपुर गांव में इन दिनों जंगली जानवरों की सक्रियता ने ग्रामीणों के बीच आतंक का माहौल पैदा कर दिया है। देर रात की एक डरावनी घटना में, एक गुलदार ने 10 वर्षीय अंश पर अचानक हमला कर दिया, हालांकि बच्चे ने अपनी साहसी प्रतिक्रिया की बदौलत अपनी जान बचा ली। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत बचाव की कहानी है, बल्कि यह क्षेत्रीय वन संरक्षण और मानव-जंगली जानवर संघर्ष के बढ़ते जोखिमों पर प्रकाश डालती है। विजयपुर गांव के स्थानीय निवासियों का कहना है कि गुलदार की लगातार आवाजाही के कारण पूरा इलाका डर से कांप रहा है, जहाँ शाम होते ही लोग बच्चों और बुजुर्गों को घरों से बाहर निकलने से रोक रहे हैं।
घटना की विवरण के अनुसार, अंश गांव में ही था जब अचानक एक गुलदार ने उस पर झपट्टा मारा। अचानक हुए इस हमले से बच्चा प्रारंभिक क्षणों में घबरा गया, लेकिन वह हौसला नहीं हारा। अपनी अद्भुत साहसिकता और तेज रफ्तार प्रतिक्रिया के कारण, अंश किसी तरह गुलदार के चंगुल से मुक्त होकर सुरक्षित बच निकला। घटना के तुरंत बाद परिजनों ने घबराहट में अंश का चिकित्सा उपचार कराया और उसकी स्थिति की जांच की। इस घटना ने पूरे गांव में एक अलग ही सतर्कता का माहौल खड़ा कर दिया है, जहाँ लोग अब हर आवाज और हर गतिविधि को संदेह की नजर से देखने लगे हैं।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय मोड पर आ गई। गदगदिया रेंज के वन क्षेत्राधिकारी जगदीश जोशी ने संवाददाताओं को बताया कि विभाग की ओर से घटना की जानकारी ली गई है और पीड़ित बच्चे का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद, पीड़ित परिवार को मुआवज़ा उपलब्ध कराया जाएगा। वन अधिकारियों का दावा है कि वे क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियों पर नज़र रख रहे हैं ताकि आगे किसी बड़ी हादसे को रोका जा सके, हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि मौजूदा प्रयासों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
विजयपुर गांव के ग्रामीणों ने वन विभाग से संयुक्त मांग की है कि क्षेत्र में निगरानी और गश्त की तादाद बढ़ाई जाए। स्थानीय लोगों का तर्क है कि गुलदार की सक्रियता को देखते हुए तत्काल प्रभाव कदम उठाए जाने की जरूरत है, ताकि किसी भी बड़ी और घातक घटना को रोका जा सके। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना के बाद से ही गांव में दहशत का माहौल है और लोग रात को घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। यह घटना वन क्षेत्र और बसाहटों के बीच बढ़ते संपर्क के संवेदनशील मुद्दे को उजागर करती है, जहाँ मानव और जंगली जानवरों के बीच संतुलन बनाए रखना अब एक चुनौती बनकर उभरा है। स्थानीय समाज अब प्रशासन से अपेक्षा करता है कि वह न केवल मुआवज़े की प्रक्रिया को तेज करे, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को भी लागू करे।
