उत्तराखंड सरकार ने अपने द्वितीय राजभाषा के रूप में मान्यता प्राप्त संस्कृत को आम जनता तक पहुँचाने के लिये एक नई पहल की घोषणा की है। आगामी कुंभ मेला, जो हरिद्वार‑ऋषिकेश में आयोजित होगा, इस योजना का प्रमुख मंच बन जाएगा।
मेला आने वाले देश‑विदेश के तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का स्वागत विशेष रूप से तैयार किए गए संस्कृत अभिवादन, श्लोक और वाक्यों से किया जाएगा। प्रवेश द्वारों पर स्थापित सूचना कियोस्कों पर संस्कृत में मार्गदर्शन संकेत, बैनर और डिजिटल स्क्रीन पर शास्त्रीय पंक्तियाँ प्रदर्शित होंगी।
पर्यटकों को मिलने वाले स्वागत पैकेट में भी संस्कृत के छोटे‑छोटे उद्धरण और श्लोक शामिल किए जाएंगे, जिससे वे इस प्राचीन भाषा की मिठास को महसूस कर सकें। साथ ही, स्थानीय कलाकारों द्वारा संस्कृत में गाए गए भजन और कथा सत्रों का आयोजन भी किया जाएगा।
सरकार ने बताया कि इस पहल के माध्यम से न केवल कुंभ में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को एक विशिष्ट सांस्कृतिक अनुभव मिलेगा, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध विरासत को भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया जा सकेगा। यह कदम राज्य की भाषा नीति को सुदृढ़ करने और संस्कृत के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
