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राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के पैतृक घर में नया जीवन: बलूनी ने बनाया संग्रहालय का आरम्भ

संसद सदस्य अनिल बलूनी ने लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र में स्थित 1962 के भारत‑चीन युद्ध के अमर शहीद बाबा जसवंत सिंह रावत के पैतृक गांव बाडियूं का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने शहीद की जन्मस्थली पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की, पवित्र माटी को नमन किया और उनके जीर्ण‑शीर्ण आवास को एक भव्य संग्रहालय व प्रेरणास्थल के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया।

बाद में बलूनी ने बाबा जसवंत सिंह के परिजनों से बातचीत की। परिजनों ने इस पहल की सराहना करते हुए संग्रहालय के निर्माण के लिए अपनी सहमति भी व्यक्त की। बलूनी ने बताया कि शहीद के पैतृक घर की वर्तमान स्थिति जीर्ण-शीर्ण है, और इसे एक आधुनिक संग्रहालय के रूप में स्थापित करना प्राथमिकता से किया जाएगा। उन्होंने कहा, “बाडियूं गांव केवल एक स्थान नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति का तीर्थ है। इसे देश‑विदेश से आने वाले लोगों के लिए एक प्रमुख स्मारक बनाया जाएगा, ताकि वे ‘नेफा हीरो’ के अद्वितीय पराक्रम से रूबरू हो सकें।”

बाबा जसवंत सिंह रावत, जिन्हें ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया, 19 अगस्त 1960 को 4 गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए। 1962 के युद्ध में, 21 वर्ष की आयु में, उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के नूरानांग (तत्कालीन नेफा) में तीन दिनों तक अकेले मोर्चा संभाला, लगभग 300 दुश्मन सैनिकों को मात दी और मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

इस दो‑दिवसीय संगठनात्मक एवं क्षेत्रीय प्रवास के दौरान बलूनी ने चौबट्टाखाल और लैंसडाउन विधानसभाओं का व्यापक दौरा किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठनात्मक विषयों पर चर्चा की और स्थानीय जनसमस्याओं को सुना। गडरी गांव में रात्री प्रवास के दौरान, उन्होंने ग्रामीणों के साथ भोजन साझा किया, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया और उनके विकास की अपेक्षाओं को सुना, जिन पर त्वरित समाधान का भरोसा दिया गया।

इस पहल के साथ, बलूनी ने उम्मीद जताई कि बाबा जसवंत सिंह का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

Original Title: राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के पैतृक घर को बनाया जाएगा संग्रहालय, बलूनी का ऐलान

Original Content: सांसद अनिल बलूनी ने लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र स्थित 1962 के भारत-चीन युद्ध के अमर बलिदानी ‘नेफा हीरो’ बाबा जसवंत सिंह रावत (महावीर चक्र) के पैतृक गांव बाडियूं का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अमर शहीद की जन्मस्थली पर जाकर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की, वहां की पवित्र माटी को नमन किया और उनके पैतृक आवास को एक भव्य संग्रहालय व प्रेरणास्थल के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया। जसवंत सिंह के परिजनों ने की सराहना गढ़वाल सांसद ने संग्रहालय को लेकर बाबा जसवंत सिंह के परिजनों से भी बात की और उन्होंने संग्रहालय बनाने को लेकर अपनी न केवल सहमति प्रदान की बल्कि अनिल बलूनी के इस प्रयास की भी सराहना की। बलूनी ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अदम्य साहस का परिचय देने वाले बाबा जसवंत सिंह का पैतृक घर वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। उन्होंने घोषणा की कि इस ऐतिहासिक स्थल के पुनरुद्धार का कार्य प्राथमिकता से किया जाएगा और इसे बाबा जसवंत के जीवन व वीरता से जुड़े एक आधुनिक संग्रहालय के रूप में स्थापित किया जाएगा। राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा बाबा का बलिदान सांसद अनिल बलूनी ने कहा, “बाबा जसवंत सिंह का बाडियूं गांव केवल एक गांव नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति का तीर्थ है। इसे देश के वीर शहीदों के प्रमुख स्मारक के रूप में संवारा जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोग अपने इस ‘नेफा हीरो’ के अद्वितीय पराक्रम से रूबरू हो सकें और उन्हें नमन कर सकें। उनका यह बलिदान आने वाली तमाम पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।” 21 साल की उम्र में रचा था अद्वितीय इतिहास गौरतलब है कि बाबा जसवंत सिंह रावत 19 साल की अल्पायु में 19 अगस्त 1960 को 4 गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे। वर्ष 1962 के युद्ध में अरुणाचल प्रदेश (तत्कालीन नेफा) के नूरानांग में उन्होंने मात्र 21 साल की उम्र में अभूतपूर्व वीरता का परिचय दिया था। तीन दिनों तक विषम परिस्थितियों में अकेले मोर्चा संभालते हुए उन्होंने लगभग 300 दुश्मन सैनिकों को ढेर किया और मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके इस अदम्य शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था। ग्रामीणों से किया जनसंवाद इससे पूर्व, अपने दो दिवसीय संगठनात्मक एवं क्षेत्रीय प्रवास के दौरान सांसद बलूनी ने चौबट्टाखाल और लैंसडाउन विधानसभाओं का व्यापक दौरा किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठनात्मक विषयों पर चर्चा की और स्थानीय जनसमस्याएं सुनीं। जनसरोकारों से जुड़ते हुए सांसद बलूनी ने चौबट्टाखाल के गडरी गांव में रात्रि प्रवास किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के साथ आत्मीय संवाद किया, उनके साथ भोजन साझा किया और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। ग्रामीणों ने सांसद के इस सरल और सहज अंदाज का स्वागत करते हुए क्षेत्र के विकास से जुड़ी अपेक्षाएं साझा कीं, जिन पर त्वरित समाधान का भरोसा दिया गया। Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

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