मध्य प्रदेश के देवास शहर में निजी चिकित्सकों और नर्सिंग होम संचालकों को डराकर लाखों की उगाही करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। इस मामले में प्रमुख आरोपी का नाम सामने आने के बाद उत्तराखंड के देहरादून से भी जुड़ाव उजागर हुआ। गिरोह के सदस्य खुद को बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकार बताकर डॉक्टरों को बदनाम करने, उनके खिलाफ कार्रवाई कराने की धमकी देते थे और इस तरह से बड़ी रकम वसूलते थे।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के लोग पहले मरीज या नर्स के रूप में अस्पताल‑नर्सिंग होम में प्रवेश करते थे। फिर डॉक्टरों पर अवैध गर्भपात या भ्रूण के लिंग परीक्षण का दबाव बनाते, साथ ही गुप्त कैमरों से वीडियो रिकॉर्ड कर लेते। इन छिपे हुए फुटेज को आधार बनाकर वे डॉक्टरों को ब्लैकमेल करते, “वीडियो वायरल कर जेल भरवा देंगे” जैसी धमकियों से उन्हें लाखों की रकम देने के लिए मजबूर करते। इस प्रक्रिया में कई महिला सदस्य भी शामिल थीं, जो अक्सर “पत्रकार” का ताना-बाना बुनतीं।
गिरोह ने देवास के श्रीराम नर्सिंग होम को भी निशाना बनाया। महिला सदस्य ने डॉक्टरों को गर्भपात कराने का दबाव डाला, परन्तु डॉक्टरों ने इनकार किया। इसके बाद रिकॉर्ड किया गया वीडियो दिखाकर 15 लाख रुपये की माँग की गई; भुगतान न होने पर वीडियो सार्वजनिक करने और प्रशासन को सौंपने की धमकी दी गई। इसी तरह माहेश्वरी नर्सिंग होम पर भी हमला हुआ, जहाँ प्रारम्भ में 21 लाख की मांग की गई, बाद में 16 लाख पर समझौता हुआ, और डॉक्टर ने डर के कारण 10 लाख नकद रूप में दे दिया। जांच के दौरान सह-अभियुक्त श्रीकांत उपाध्याय की कार से 3.5 लाख रुपये बरामद किए गए, जो दोनों मामलों में वसूली गई राशि से संबंधित हैं।
मुख्य आरोपी विनय अरोरा ने अदालत में खुद को पत्रकार बताते हुए कहा कि वह “भ्रूण हत्या के खिलाफ खोजी पत्रकारिता” कर रहा था और अपनी उम्र व बीमारी का हवाला देकर जमानत माँगी। न्यायालय ने इस दावे को गंभीरता से नहीं लिया, यह स्पष्ट किया कि प्रस्तुत तथ्य पत्रकारिता के नाम पर डॉक्टरों को डराकर धन वसूली की ओर इशारा करते हैं। अब पुलिस गिरोह के फरार सदस्यों और सहयोगियों की तलाशी जारी रखे हुए है, जबकि मामला अभी भी जांच के चरण में है।
