देहरादून में पत्रकार वार्ता के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस नेता तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बयानों पर कटु प्रतिक्रिया दी। धामी ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों को लेकर जनता में “गलत नैरेटिव” और “भ्रम” फैलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने जोड़ते हुए कहा, “लोकतंत्र में सवाल पूछना आवश्यक है, परन्तु संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले तथ्य और प्रमाण प्रस्तुत किए जाने चाहिए।” इस संदर्भ में उन्होंने 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए कहा कि वह दिन आयोग की कार्यवाही को स्पष्ट करने के लिए था।
मुख्य चुनाव आयुक्त की 26 सितंबर की घोषणा के बाद, धामी ने 24 जून 2025 को जारी किए गए आदेश की “सर्वसम्मति” से लिये गये होने का दावा किया और बताया कि इसके बाद ही सिविल आयुक्त (एसआईआर) सहित अन्य प्रक्रियाएँ आगे बढ़ी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन कदमों का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता को उसके अधिकार से वंचित करना नहीं है; बल्कि श्रमिकों, गरीब वर्ग और प्रथम बार मतदान करने वाले नागरिकों के लिए विशेष कैंप लगाकर प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने का प्रयत्न किया जा रहा है।
राहुल गांधी की व्यक्तिगत आलोचना में धामी ने कहा कि वह “पूरी तरह संस्कार‑विहीन” हो चुके हैं और उनमें राजनीतिक या सामाजिक गंभीरता का कोई अंश नहीं बचा। उन्होंने गांधी परिवार की पृष्ठभूमि को उजागर करते हुए कहा, “उनके पिता, दादी, माँ और स्वयं वह सभी प्रधानमंत्री पदों से जुड़े रहे हैं, फिर भी वह मानते हैं कि गरीब माँ का बेटा देश को कैसे चला रहा है।” धामी ने यह भी आरोप लगाया कि गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत माता के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जिससे राजनीतिक विरोध में भी एक मर्यादा रखी जानी चाहिए।
अंत में, धामी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को “उत्तराखंड के गौरव” और देश की सुरक्षा में उनके योगदान को सराहते हुए कहा कि राहुल गांधी लगातार सेना और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के संगठन को “पहले ही कमजोर” करारते हुए कहा कि उसके कार्यकर्ता अब राजनीतिक मुद्दों से हटकर अन्य चर्चाओं में लगे हुए हैं। धामी ने निष्कर्ष निकाला कि “झूठ का पर्दाफाश हमेशा होता है, और अंततः सच्चाई सामने आती है,” और सभी सवालों का जवाब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही दिया जाना चाहिए।
