उत्तराखंड के पूर्व पुलिस प्रमुख अशोक कुमार पर हाल ही में एक चौंकाने वाला निर्णय सुनाया गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है कि वे हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति (Vice-Chancellor) पद से तीन हफ्तों के भीतर इस्तीफा दें। यह निर्णय उनके नियुक्ति पर उठे कानूनी सवालों के बाद आया है, जिसमें डॉ. डी.एस. मोर (देवेंद्र सिंह मोर) और एक अन्य याचिकाकर्ता ने चुनौती दी थी।
कहानी का आरम्भ तब हुआ जब अशोक कुमार ने अपनी सेवा से रिटायर होने के बाद हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के पद पर नियुक्ति की। इस नियुक्ति को तत्कालीन विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में अवैध कहा गया, क्योंकि यह पद केवल कुलपति के लिए आरक्षित था और इसके लिए आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी नहीं की गई थीं। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि कुलपति के वेतन निर्धारण से जुड़ी एक पत्रिका भी नियमों के विपरीत थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद इस याचिका का निस्तारण करते हुए अशोक कुमार को पद से इस्तीफा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उनके इस्तीफे के बाद वरिष्ठ डीन को अंतरिम रूप से कुलपति के पद पर नियुक्त किया जाए।
इस घटना पर स्वयं अशोक कुमार ने भी टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि वे पहले से ही पारिवारिक कारणों से इस पद से हटने का मन बना चुके थे। उन्होंने अपनी परिवार को समय देने के लिए इस्तीफा देने की बात कही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका कार्यकाल दिसंबर 2025 में समाप्त हो चुका था।
इस निर्णय का प्रभाव विश्वविद्यालय की प्रशासनिक संरचना पर पड़ेगा और यह दिखाता है कि उच्च शिक्षा के पदों पर नियुक्तियाँ भी कानूनी ढांचे के भीतर होनी चाहिए।
