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विजय बड़थ्वाल का सियासी हमला: अंकिता भंडारी हलाकांड से देहरादून की कानून-व्यवस्था तक, BJP सरकार के 7 मुद्दों पर उठे सवाल

उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों के आरंभ होने से कुछ ही महीने दूर हैं, और इसी कड़ी में सत्ताधारी भारतीय জনता पार्टी (BJP) के भीतर एक ज्वलंत सियासी संघर्ष कायम है। हाल ही में खजाना-मधु चोहान प्रकरण की कड़वाहट शांत होने की उम्मीदें ही जमाई थीं कि पार्टी की वरिष्ठ नेत्रिय, पूर्व मंत्री, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और यमकेश्वर से पूर्व विधायक विजय बड़थ्वाल ने अपनी ही सरकार के विरुद्ध एक सख्त सियासी मोर्चा खोल दिया है। बड़थ्वाल ने अंकिता भंडारी हलाकांड, राजधानी देहरादून की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और कई हाई-प्रोफाइल मामलियों की जांच की धीमी रफ्तार को केंद्र में रखा है। राजनीतिविदों का मानना है कि बड़थ्वाल का यह कदम न के आमजन की मांगों को अपनी बनी प्रस्तुत करने की कोशिस है, बल्कि आगामी चुनावों में यमकेश्वर सीट से टिकट के लिए दबाव बनाए हुए एक सियासी रणनीति भी है।

अंकिता भंडारी हलाकांड के मामले में, सरकार ने सद्धेस सीबीआई जांच की अनुमति देने का श्रेय लिया है, लेकिन विजय बड़थ्वाल ने इस जांच की गतिशीलता पर सवाल खड़ा किए हैं। उन्होंने स्पष्ट मांग की है कि यह जांच एक निर्धारित समय-सीमा के अंदर पूरी की जाए और उसके निष्कषो को सार्वजनिक किया जाए। यमकेश्वर की पूर्व विधायक के रूप में, उन्होंने इसे अपनी निजी चिंता के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस षड्यंत्र से जो भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभलशाली हो, बेनकाब होना ज़रूरी है। यह बयान उन चर्चाओं को नई जान देता है जो इस घटन में कुछ VIP चेहरों की संभव संलग्नता के इशारों को उजागर करते हैं। विशेष रूप से, बड़थ्वाल की यह आपत्ति अहम इसलिए भी है क्योंकि वनतरा रिजॉर्ट का बडोजर से गिराने के मामले में मौजूदा भाजपा विधायक रेनू बिस्त का भी कभी-कभी जिक्र किया जाता रहा है, जिससे राजनीतिक गतिविधिया और तीव्र हो गई हैं।

राजधानी देहरादून की कानून-व्यवस्था की बिगड़ती हालत ने भी बड़थ्वाल को चिंतित किया है। उन्होंने 23 सितंबर की सुबह व्यस्त नालापानी चोक पर एक औरत का अपहरण करने के प्रयास को उदाहरण देते हुए सवाल उठया कि ‘राजधानी की व्यस्त सड़क पर अपराधियों को इतने बेखौफ कैसे हो?’ उन्होंने पुलिस की गश्ती में ढिलाई और बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों पर कार्रवाई न होने को अपनी ज़िम्मेदारीयों के विरुद्ध एक विफलता के रूप में प्रस्तुत किया। इसके अलावा, उन्होंने सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर की हलाकांड और सड़कों पर हथियार लहराने के मामलियों को उजागर करते हुए बार-रेस्टोरेंट के समय का कड़ाई से पालन करने की भी मांग की है।

शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर भी बड़थ्वाल ने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आश्रित कोटे में फर्जी प्रमापत्रों के साथ MBBS में प्रवेश के मामलियों को उजागर करते हुए कहा कि यह मेहदी बच्चों के अधिकारों पर डकैती है। उन्होंने लगभग 350 संदिग्ध मामलियों की समयबद्ध जांच और स्यापन में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा, खानपूर विधायक के फार्महाउस से जोड़े गए कथित समूहिक दुष्कर्म प्रकरण पर उन्होंने पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की, जो अप्रेशित रूप से जांच एजेंसियों पर राजनीति दबाव नहीं डालने का संदेश देती है।

विजय बड़थ्वाल द्वारा उठे इन सात प्रमुख मुद्दों में नालापानी चोक अपहरण प्रयास के आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, अंकिता भंडारी मामले की सीबीआई जांच का समयबद्ध और सार्वजनिक निष्कष, MBBS फर्जीवाड़े की जांच, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के विरुद्ध सघन एक्शन, स्कूल-कॉलेज और बस स्टरों पर औरत पुलिस की गश्ती, बार-रेस्टोरेंट के समय का पालन, और राजधानी के सीसीटीवी नेटवर्क की समीक्षा शामिल है। इन मांगों के माध्यम से, बड़थ्वाल ने न के भाजपा सरकार को असहज बनाया है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी सियासी पोजीशन को भी मजबूत करने का एक स्पष्ट प्रयास किया है।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

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