उत्तराखंड में गूँजती हुई “अंकिता हत्याकांड” की न्याय की अलख को फिर से प्रज्वलित करने के लिए जनांदोलन की लहर तेज़ी से बढ़ रही है। हाईकोर्ट ने हत्याकांड के दोषियों की याचिका को खारिज कर दिया था, जिससे सामाजिक संगठनों ने इसे जनसंघर्षों और व्यापक जनसमर्थन की बड़ी जीत कहा, परन्तु वे मानते हैं कि न्याय की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई। इस संदर्भ में ‘उत्तराखंड महिला मंच’ और ‘अंकिता यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ ने अपनी अगली रणनीति तैयार कर ली है और आगामी रविवार, 13 सितंबर को दोपहर 12 बजे देहरादून स्थित शहीद स्मारक में एक महाबैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक में राज्य के नागरिक समाज, विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनांदोलनकारियों को आमंत्रित किया गया है, ताकि मिलकर न्याय के लिए एकजुट आवाज़ उठाई जा सके।
बैठक के दौरान मंच के प्रतिनिधियों ने हाईकोर्ट के फैसले को एक मील का पत्थर मानते हुए, सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जनता के दबाव के चलते राज्य और केंद्र सरकार ने मामले की CBI जांच का आदेश जारी किया, परन्तु नौ महीने बीत जाने के बाद भी CBI ने किसी से पूछताछ शुरू नहीं की। इस देरी को उन्होंने “साक्ष्य मिटाने वाले मुख्य अपराधियों और रिसॉर्ट में ‘स्पेशल सर्विस’ की मांग करने वाले वीआईपी चेहरों को बचाने की कोशिश” बताया, जिससे केंद्रीय जांच एजेंसी ने पूरे मामले पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।
मंच के पदाधिकारियों कमला पंत और निर्मला बिष्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक साजिशकर्ताओं और घिनौनी माँग करने वाले वीआईपी चेहरों को अदालत के कटघरे में नहीं लाया जाता, तब तक संघर्ष रुकने वाला नहीं है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, साक्ष्य की रक्षा करने और सरकार को ठोस कदम उठाने के लिए सामाजिक एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया। इस दिशा में 13 सितंबर की महाबैठक में 18 सितंबर को गांधी पार्क में आयोजित होने वाली विशाल श्रद्धांजलि सभा की रूपरेखा तय की जाएगी, साथ ही आगे के उग्र आंदोलन की योजना भी तैयार की जाएगी।
आंदोलनकारियों ने सभी पूर्व सहयोगियों, नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे इस महाबैठक में अनिवार्य रूप से भाग लेकर अपने सुझाव दें और अंकिता को न्याय दिलाने के इस संघर्ष को नई ऊर्जा प्रदान करें। जनसंघर्ष की इस नई लहर में हर आवाज़ को महत्व दिया जाएगा, ताकि न्याय की अलख को अंततः सच्ची जीत मिल सके।
