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हिन्दुस्तान के उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ख़ार्गे द्वारा आयोजित जनसभा के बाद, 11 अगस्त को उसी रामलीला मैदान में धार्मिक अनुष्ठान और गंगाजल छिड़कने का विवाद सामने आया। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को “शुद्धिकरण” के रूप में वर्णित करते हुए दलित समाज के अपमान का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इसे तथ्यहीन और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। इस विवाद के बीच, हल्द्वानी शुद्धिकरण प्रकरण में एक नया मोड़ आया है – वाल्मीकि समाज की शिकायत के आधार पर राहुल गांधी पर एफआईआर दाखिल करने की संभावना।
वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि अमित कुमार, जिन्होंने स्वयं को दलित और वाल्मीकि समाज का बताया, वास्तव में इस समाज से संबंधित नहीं हैं। वे आरोप लगाते हैं कि अमित कुमार ने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दाखिल करते समय अपने नाम को “वाल्मीकि समाज से” बताकर समाज के नाम का गलत इस्तेमाल किया। इसके अतिरिक्त, समाज के लोगों का कहना है कि अमित कुमार का एक भाजपा नेता का भाई भी है, जिससे इस मामले में हितों का टकराव स्पष्ट होता है। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि पुलिस अमित कुमार की वास्तविक पहचान और वाल्मीकि समाज से उसके संबंध की जाँच करे।
पुलिस को लिखित शिकायत सौंपे जाने के बावजूद, अभी तक किसी आधिकारिक बयान से बच रही है। यदि वाल्मीकि समाज के आरोप सत्यापित होते हैं, तो राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल एफआईआर का पूरा मामला उलट सकता है, जिससे न केवल राहुल गांधी को राहत मिल सकती है बल्कि बीजेपी की भी स्थिति कमजोर हो सकती है। इस विवाद ने शुद्धिकरण मसले को एक नया रंग दिया है और उत्तराखंड BJP को भी इस मुद्दे पर पुनः विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है।
इस बीच, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए तीन दिन बाद के धार्मिक अनुष्ठान और गंगाजल छिड़कने की घटनाएँ दोनों पक्षों के बीच जातिगत और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा रही हैं। यदि पुलिस इस मामले में स्पष्टता लाती है, तो यह हल्द्वानी शुद्धिकरण प्रकरण के भविष्य को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।
