उत्तराखंड में 179 मदरसों पर ताले: धामी सरकार की सख्त कार्रवाई, नई मान्यता प्रक्रिया में हड़कंप

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को नया रूप देने के प्रयासों के बीच धामी सरकार की सख्त कार्रवाई ने राज्य भर के मदरसों में हड़कंप मच दिया है। जोशीपुर-चमोली से लेकर हरिद्वार तक, राज्य के चार प्रमुख जिलों से मिली ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 179 मदरसों पर ताले जमा दिए गए हैं। यह आंकड़ा उन सभी संस्थानों का है जिनकी प्रत्यक्ष जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन) के दौरान टीमों ने पाया कि वे नई नियमों के तहत आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं या इनके पास मान्यता के लिए आवेदन प्रक्रिया अधूरी है। यह कार्रवाई 1 जुलाई को पुराने मदरसा बोर्ड के भंग होने के बाद शुरू की गई सख्त निगरानी का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसने राज्य में शिक्षा प्रशासनिक ढांचे को समायोजित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाने की ओर संकेत किया है।

कार्रवाई की सबसे बड़ी वजह मान्यता प्रक्रिया में देरी और अनियमितताएं पाई गई हैं। शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की संयुक्त टीमों ने मौके पर जाकर यह सत्यापित किया कि कौन से मदरसे वास्तव में संचालित हैं, वहां कितने बच्चे पढ़ रहे हैं और क्या संचालक ने नई व्यवस्था के अनुरूप मान्यता के लिए आवेदन किया है। जांच में सामने आया कि कई संस्थानों ने अपने बच्चों के रिकॉर्ड नहीं बनाए रखे थे या वे नई पोर्टल-आधारित प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए थे। इसी कड़ी में, अब तक 134 मदरसों ने शिक्षा विभाग के पोर्टल पर मान्यता के लिए आवेदन किया है। इनमें से 65 को शिक्षा विभाग की और 35 को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की प्रारंभिक मान्यता मिल चुकी है, जबकि 30 आवेदनों की प्रक्रिया अभी भी जारी है। शेष संस्थानों के संबंध में प्रशासन ने ताले जमाने का फैसला लिया है, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

जिलावार आंकड़ों से पता चलता है कि हरिद्वार जिले में सबसे अधिक, यानी 102 मदरसे बंद किए गए हैं। इसके बाद ऊधमसिंह नगर में 55, देहरादून में 12 और नैनीताल में 10 मदरसे शामिल हैं। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह आंकड़ा अभी तक केवल चार जिलों का है, जबकि उत्तराखंड में अन्य नौ जिलों की रिपोर्ट अभी बाकी है। विशेषज्ञों और प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि इन नौ जिलों की जांच पूरी होने के बाद बंद किए गए मदरसों की कुल संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। पूर्व में 1 जुलाई से पहले पुराने बोर्ड के तहत 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत हर एक संस्थान को शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से पुनः मान्यता लेना अनिवार्य बना दिया गया है।

सरकार का यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी मदरसा बिना सही रिकॉर्ड, पर्याप्त बुनियादी ढांचे और सही मान्यता के संचालित नहीं रह सकता। यह सख्ती इस बात को सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि राज्य में शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों का हित संरक्षित रहे और संचालक अपनी जिम्मेदारियां पूरी करें। आने वाले दिनों में, बची हुई नौ जिलों की जांच का परिणाम आने पर राज्य में मदरसों की कार्यप्रणाली और विलंबित कार्रवाई की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी, जो धामी सरकार की शिक्षा नीति को लागू करने की दृढ़ता को दर्शाती है।