खटीमा गोलीकांड की 32वीं वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद राज्य आंदोलनकारियों को गहरी श्रद्धांजलि अर्पित की। मंगलवार को खटीमा में आयोजित स्मृति समारोह में भाग लेते हुए सीएम ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों की प्रतिमाओं को नमन किया और शहीदों के परिवारों को सम्मानित करते हुए उन्हें अंगवस्त्र भेंट किए। सीएम ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि आज के उत्तराखंड का अस्तित्व इन वीर सपूतों के त्याग और बलिदान की दराजत है।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह, रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानन्द भट्ट और परमजीत सिंह जैसे अमर बलिदानियों का नाम लेते हुए कहा कि उत्तराखंड का हर नागरिक इनकी कुर्बानी का सदा ऋणी रहेगा। सीएम धामी ने अपने अनुभवों को याद करते हुए बताया कि खटीमा गोलीकांड ने अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की, जिससे जनता अधिकारों की लड़ाई के लिए और भी प्रेरित हुई। उन्होंने कहा कि खटीमा की धरती राज्य आंदोलन की ‘तपोभूमि’ है और इसे आंदोलन की जननी कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं। खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा जैसे घटनाक्रमों में आंदोलनकारियों ने अपने रक्त से आसमान छूने वाला उत्तराखंड का इतिहास लिखा है।
सीएम ने जोर देकर कहा कि यह राज्य किसी उपहार के रूप में नहीं मिला, बल्कि अनगिनत आंदोलनकारियों के कठोर संघर्ष, त्याग और बलिदान की फसल है। उन्होंने आवाहन किया कि इन शहीदों के सपनों को पूरा करके उत्तराखंड का निर्माण करना ही उन पर हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
साथ ही, सीएम ने राज्य सरकार द्वारा आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए किए गए विशेष कदमों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिह्नित आंदोलनकारियों या उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण अधिनियम, 2023’ के तहत राजकीय नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, शहीदों के आश्रितों की मासिक पेंशन 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है। राज्य आंदोलन के दौरान घायल हुए या जेल गए आंदोलनकारियों को 7,000 रुपये और सक्रिय आंदोलनकारियों को 5,500 रुपये प्रति माह की पेंशन दी जा रही है। सरकार ने चिह्नित आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी करने और सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने के कदम उठाए हैं, ताकि इतिहास के इन गौरवशाली पलों की यादगार सेवाएं जारी रहें।
