उत्तराखंड के गरुड़ क्षेत्र के छोटे से गांव हवील कुलवान की बेटी नेहा कांडपाल ने अपने दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से एक उल्लेखनीय मुकाम हासिल किया। भारतीय-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने उन्हें असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर चयनित किया, जिससे न केवल उनका परिवार बल्कि पूरे गांव में गर्व और उत्सव की लहर दौड़ गई। नेहा का यह सफलता‑संध्या उनके पिता नारायण दत्त कांडपाल, जो पेशे से ड्राइवर हैं, और गृहिणी माँ आशा देवी के सपनों को भी साकार कर गया, जो हमेशा अपने बच्चों को शिक्षा और आत्मविश्वास की राह पर ले जाने की कोशिश करते रहे।
नेहा ने अपना शैक्षणिक सफर उत्तराखंड के प्रतिष्ठित जवाहर नवोदय विद्यालय, सीमार से शुरू किया, जहाँ उन्होंने हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने राइका सिरकोट से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और इस दौरान अपने करियर के लक्ष्य को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया। सीमित संसाधनों और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद, नेहा ने लगातार पढ़ाई और शारीरिक तैयारी में लगन दिखाई, जिससे वह राष्ट्रीय सुरक्षा बलों में चयन के योग्य बनीं। उनका चयन ITBP के महत्वपूर्ण पद पर इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इरादा और निरंतर प्रयास बड़े संसाधनों से अधिक मायने रखते हैं।
हवील कुलवान में नेहा के चयन की खबर सुनते ही गाँव की गलियों में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों, मित्रों और शुभचिंतकों ने एकत्रित होकर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कई लोगों ने कहा कि नेहा ने न केवल अपने माता‑पिता का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवा वर्ग के लिए एक प्रेरक उदाहरण स्थापित किया है। उनका सफर एक साधारण ड्राइवर के बेटे से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा बल में असिस्टेंट कमांडेंट तक, छोटे गाँवों में पले‑बढ़े युवाओं को यह संदेश देता है कि बड़े सपने देखना और उन्हें साकार करने की हिम्मत रखना संभव है।
नेहा कांडपाल की यह उपलब्धि यह स्पष्ट करती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो गांव की पगडंडी से निकल कर देश सेवा के सर्वोच्च मंच तक पहुँचा जा सकता है। उनका उदाहरण उन सभी युवा aspirants के लिए प्रेरणा बन गया है, जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहते हैं। इस जीत ने गरुड़ के ग्रामीणों में आशा की नई किरण जलाई है और यह साबित किया है कि मेहनत, लगन और सच्चा इरादा किसी भी बाधा को पार कर सकता है।
