उत्तराखंड के रामनगर जिले में प्रशासन ने वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए एक कठोर और व्यवस्थित अभियान का दूसरा चरण शुरू कर दिया है, जिससे स्थिति में तनाव और भावनात्मक उभार दोनों दिखाई दिए। शनिवार को सुबह करीब 6:30 बजे से तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अपर कोसी क्षेत्र में भारी मशीनरी और बुलडोजरों के साथ कार्रवाई शुरू की गई। इस लाइन ऑफ एक्शन के दौरान करीब 80 से 82 परिवारों के कच्चे और पक्के मकानों को ध्वस्त किया जा रहा है। प्रशासन ने इस संवेदनशील कार्रवाई को सुचारू रूप से पूरा कराने के लिए पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जहां भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारियों और फायर ब्रिगेड की टीमें तैनात थीं ताकि कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके और कोई अनैतिक घटना नहीं हो।
यह अभियान वन भूमि पर चल रहे अतिक्रमण हटाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। इससे पहले, वर्ष 2025 में हुए फेज-1 के तहत करीब 51 परिवारों को हटाया जा चुका था। वर्तमान दूसरे चरण की तैयारी 90 से अधिक परिवारों के लिए की गई थी, हालांकि इनमें से करीब 9 से 10 परिवारों के मामले उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण प्रशासन ने उन्हें कार्रवाई से अलग रखा है। शेष बचे 80 से 82 परिवारों के मकानों पर ही बुलडोजर चलाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षा और प्रबंधन को आसान बनाने के लिए प्रशासन ने पहले से ही इलाके को चार सुपर जोन, सात जोन और 14 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित कर दिया था, जिससे हर नुक्ते पर नियंत्रण बनाए रखा जा सका।
कार्रवाई शुरू होने से पहले ही मौके पर हलचल का माहौल था। गौरतलब है कि शुक्रवार की देर रात से ही कई प्रभावित लोगों ने अपने मकानों को खुद तोड़ना शुरू कर दिया था, जहां देखा गया कि लोग जल्दी-जल्दी घरों से ईंटें, दरवाजे और अन्य जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे थे। शनिवार की सुबह जब प्रशासन ने तय कार्यक्रम के अनुसार बुलडोजर चलाए, तो इलाके में मायूसी और डर का माहौल हावी था। कई महिलाएं और पुरुष अपने घरों के टूटते देख भावुक हो गए, जबकि कई परिवारों ने यह आशंका जताई कि ठंडे मौसम में बच्चों और बुजुर्गों सहित पूरा परिवार किसके कंधे पर चढ़ाकर और किस स्थान पर शरण लेगा। मकान खाली करने और सामान को सुरक्षित जगह पहुंचाने की चिंता ने कई परिवारों को गहरी परेशानी में डाल दिया है।
फिलहाल, अपर कोसी क्षेत्र में प्रशासन का यह अभियान पूर्ण रूप से जारी है। पुलिस और प्रशासनिक टीमें लगातार मौके पर तैनात हैं और कार्रवाई की हर कड़ी पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य केवल अतिक्रमण हटाना ही नहीं, बल्कि इसे शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूरा करना है, ताकि वन संरक्षण के इस महत्वपूर्ण कदम को कारगर बनाया जा सके।
