उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार को हुए भयावह हेलीकॉप्टर हादसे ने पूरे राज्य और देश को शोक में डुबा दिया है। जोशीमठ क्षेत्र के चाई गांव के निकट, हाथी पर्वत की खतरनाक चट्टानों से टकराकर एक हेलीकॉप्टर धराशयी हो गया, जिसमें सवार पायलट समेत सभी छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह दुर्घटना दोपहर करीब 1:14 बजे घटी, जब ट्रांस भारत एविएशन (TBA) का हेलीकॉप्टर बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड के लिए उड़ान भर रहा था। उड़ान के कुछ देर बाद ही हेलीकॉप्टर का नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया, और तत्पश्चात विमान के हाथी पर्वत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली। चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने इस दुर्घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सभी यात्रियों को बचाने की कोशिशों के बावजूद उनकी मौत हो गई।
घटना की सूचना सबसे पहले भारतीय सेना की ओर से जिला प्रशासन को दी गई थी। जैसे ही खबर मिली, पुलिस, एनडीआरएफ, सेना और आईटीबीपी की कड़ी मुहिम शुरू कर दी गई। यूकाडा के सीईओ प्रतीक जैन के अनुसार, हेलीकॉप्टर जोशीमठ में मारवाड़ी पुल के ऊपर स्थित जेपी पावर हाउस की ओर की पहाड़ी पर टकराया था। हादसे में जान गंवाने वालों में दिल्ली के निवासी 48 वर्षीय पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल शामिल हैं। साथ ही, कर्नाटक से आए पांच यात्रियों की भी मौत हुई है। मृतकों की पहचान प्रताप (41), अरुण सालुंके (44), वीबी शंकर गौड़ा (39), सुधीर के. (50) और एचएस नटराजा (51) के रूप में हुई है। सूचना के अनुसार, अरुण सालुंके कर्नाटक में सीसीबी इंस्पेक्टर थे और वे अपने साथियों के साथ बदरीनाथ धाम की तीर्थ यात्रा पर गए थे।
प्रधानमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस जनहानि पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने दिवंगतों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को दुर्घटना के वास्तविक कारणों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच करने के कड़े निर्देश दिए हैं। सीएम धामी ने जिला प्रशासन को भी प्रभावित परिवारों को हरसंभव आर्थिक और मानविक सहायता उपलब्ध करवाने और राहत से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से पूरे घटनाक्रम और बचाव अभियान पर नजर बनाए रखने की बात कही है।
इस घटना के फौरन बाद, एहतियातन ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटिड के सभी हेलीकॉप्टरों की उड़ानों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। प्रारंभिक तकनीकी जांच में सामने आया है कि हेलीकॉप्टर के स्वामित्व, चार्टर संचालन, पायलटिंग और रखरखाव (मैaintenance) अलग-अलग कंपनियों द्वारा संभाला जा रहा था। दुर्घटना के पीछे मौजूद तकनीकी खराबी या परिचालन से जुड़े अन्य पहलुओं की गहन जांच जारी है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
