उत्तराखंड की धरती, जिसे देवभूमि के रूप में जाना जाता है, शारदीय नवरात्रि के पवित्र अवसर पर महिलाओं के सम्मान के लिए एक नया और सशक्त पहल के साथ उभरी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता वाली सरकार ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को मान्यता देने के लिए एक विशेष प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका विधिवत पेशगी 4 अक्टूबर को चंपावत में होने वाली कैबिनेट बैठक में किया जाएगा। इस प्रस्ताव का मूल मकसद शारदीय नवरात्रि की नवमी के पवित्र दिन पर, जिन महिलाओं ने अपने अनुशासन, संघर्ष और समर्पण से समाज के लिए बेहतर का निर्माण किया है, उनका सम्मान करना है। यह पहल न केवल एक सरकारी सम्मान बल्कि देवी के नौ रूपों की आध्यात्मिक प्रेरणा का प्रतीक भी है, जिसके तहत हर प्रखंड से नौ महिलाओं का चयन किया जाएगा।
प्रस्तावित योजना के तहत, चिकित्सा, शिक्षा, खेल, समाजसेवा और अन्य विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मेहनत से पहचान बनाने वाली महिलाओं को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के एक रूप की पूजा-अर्चना होती है, और इसी भावना को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने हर प्रखंड से नौ महिलाओं के चयन की रचना की है। इस कदम का उद्देश्य उन महिलाओं के योगदान को पहचान देना है, जिनकी मेहनत अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, लेकिन जिनके प्रयासों ने समाज के विभिन्न पहलुओं को मजबूत किया है। चयन प्रक्रिया में those महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जिनके कार्य ने अपने क्षेत्र में एक benchmarks स्थापित किया हो।
4 अक्टूबर को चंपावत में होने वाली कैबिनेट बैठक इस पहल के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगी। बैठक में प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद अंतिम मंजूरी दी जाएगी, जिसके बाद ही चयन समिति का गठन और सम्मान कार्यक्रम की तैयारियां आगे बढ़ाई जाएंगी। यह कार्यक्रम नवमी के मौके पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें सम्मानित महिलाओं को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। धामी सरकार की यह पहल महिला सशक्तिकरण के प्रति राज्य के प्रतिबद्धता का एक प्रमुख उदाहरण है, जो केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक मान्यता और सम्मान पर भी बल देती है।
हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं, जिनमें नंदा गौरा योजना, मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना शामिल हैं। साथ ही, सरकारी नौकरियों में राज्य की मूल निवासी महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी महिलाओं के रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक नया आयाम जोड़ रहा है। इस नए सम्मान कार्यक्रम के माध्यम से, सरकार अपनी नीतियों को केवल संरचनात्मक परिवर्तन तक सीमित करने के बजाय, सामाजिक स्तर पर महिलाओं के सम्मान और पहचान को बढ़ावा देने का संदेश दे रही है। यह उपाय न केवल महिलाओं को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि पूरे राज्य में महिला सशक्तिकरण की एक सकारात्मक लहर को जन्म देगा, जिससे समाज के हर कोने में महिलाओं के योगदान की सराहना की जा सके।
