गदरपुर के संजय नगर गांव में सोमवार सुबह एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने स्थानीय प्रशासन और आने-जाने वाले वाहन चालकों को हैरान कर दिया। सामान्यतः प्रदर्शन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों की बजाय, इस बार सड़क पर उतरे थे ‘Gen Alpha’ (नाबालिग बच्चे) और ‘Gen Z’ (युवा पीढ़ी) के सदस्य। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 11.30 करोड़ रुपये की भारी लागत से निर्माणाधीन सड़क का काम पिछले 10 महीनों से अधर में टंगा हुआ है। इस देरी और निर्माणाधीन सड़क से उड़ती अत्यधिक धूल के कारण ग्रामीणों की परेशानियां चरम पर पहुंच गई हैं, जिसके चलते उन्होंने स्कूली बच्चों के साथ मिलकर सड़क पर बल्लियां और सामान फैलाकर जाम लगा दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
प्रदर्शनकारियों ने जो चित्र पेश किया, वह धूल के कहर का साक्षात प्रमाण है। ग्रामीणों के अनुसार, दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण उड़ती धूल इतनी घनी है कि आसपास के पेड़-पौधे पूरी तरह से सफेद पड़ चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षा के मौसम में भी यह धूल तुरंत खत्म नहीं होती, जिससे पेड़ अपनी हरियाली नहीं पा पाते। यह समस्या केवल सौंदर्य के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बना हुआ है। लगातार धूल-मिट्टी के कारण घरों के अंदर, मंदिरों में और यहां तक कि लोगों के बिस्तरों तक धूल पहुंच रही है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्य सांस संबंधी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार हो रहे हैं।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जुल्फिकार अली ने भी स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गांव के लोग इस आतंक से बेहद परेशान हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि लंबे समय से ग्रामीण इस समस्या का समाधान चाह रहे हैं, लेकिन निर्माण कार्य के पूरा न होने के कारण परेशानियां वास्तव में बढ़ती जा रही हैं। युवा पीढ़ी का यह प्रदर्शन इस बात की ओर संकेत करता है कि जब मौलिक सुविधाओं की उपलब्धता और स्वच्छ वातावरण का अधिकार छीना जाता है, तो युवा पीढ़ी भी आवाज उठाने से नहीं हिचकिचाती।
अपने प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीणों और युवाओं ने तीन मुख्य मांगें रखी हैं। सबसे पहले, वे चाहते हैं कि 11.30 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह सड़क त्वरित गति से पूरा की जाए। दूसरी मांग यह है कि सड़क निर्माण पूर्ण होने तक, धूल से राहत के लिए सड़क पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए। तीसरी मांग में, सड़क से गुजरने वाले भारी वाहनों की गति और आवाजाही को सख्ती से नियंत्रित करने की भी बात कही गई है। संजय नगर के इस प्रदर्शन ने प्रशासन को यह संदेश दिया है कि जनता के स्वास्थ्य और सुविधाओं का उल्लंघन करने वाला कोई भी प्रोजेक्ट अब बिना उत्तरदायित्व के नहीं चलेगा। यह रिपोर्ट महेंद्र पाल सिंह के इनपुट पर आधारित है।
