विश्वकर्मा पूजनोत्सव में भोजपुरी रंगीला जश्न, देहरादून में बजी बिहार की धुन

उत्तराखंड के शीतल पहाड़ी शहर देहरादून में बिहारी महासभा उत्तराखंड, देहरादून द्वारा आयोजित विश्वकर्मा पूजनोत्सव ने इस वर्ष भक्ति और भोजपुरी संस्कृति के अनूठे संगम को दर्शाया। हिंदू नेशनल इंटर कॉलेज के प्रांगण में सजे विशाल पंडाल में देर शाम तक “जय श्री विश्वकर्मा” के जयकारों की गूँज सुनाई दी, जहाँ उपस्थित लोग श्रद्धा और उत्साह के मिश्रण से मंत्रमुग्ध रह गए। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बिहार से विशेष रूप से आमंत्रित भोजपुरी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य जागरण था, जिसने पंडाल को संगीत, नृत्य और लोकगीतों की रंगीन लहरों से भर दिया।

बिहार से आए लोकप्रिय लोक गायिका प्रियंका मौर्या ने जागरण की शुरुआत में भगवान विश्वकर्मा के भजनों को अपनी मधुर आवाज़ से गाया। “चलऽ हो विश्वकर्मा बाबा के धाम” और “बाबा विश्वकर्मा करिहें बेड़ा पार” जैसे गीतों पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ ताल मिलाते हुए झूमते हुए अपने दिलों को संगीत में डुबो दिया। उनकी प्रस्तुति ने पंडाल में आध्यात्मिक ऊर्जा को और प्रज्वलित किया, जिससे सभी उपस्थित लोग भावनात्मक रूप से जुड़ गए।

पिछले दो दशकों से देहरादून में सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्य में अग्रसर रही बिहारी महासभा ने इस अवसर को अपनी निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक बनाया। हर साल छठ पूजा, बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा, विश्वकर्मा दिवस, हरतालिका तीज आदि बड़े कार्यक्रमों के साथ रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण और स्वास्थ्य जांच शिविर जैसे जनहित कार्य भी आयोजित करती आई है। अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा, “आज पंडाल में जो ऊर्जा देखी, वह इस बात का प्रमाण है कि हम उत्तराखंड में रहते हुए भी पूर्वांचल और बिहार को दिल से जीवित रखे हैं। बीस साल की हमारी मेहनत अब रंग ला रही है।” सचिव चंदन कुमार झा ने जोड़ते हुए बताया, “भोजपुरी जागरण का उद्देश्य हमारी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना था, और नंदिनी शर्मा जी ने इसे बखूबी पूरा किया। हमारा संगठन हमेशा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जुड़ाव बनाये रखता है, यही हमारी पहचान है।”

यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि उत्तराखंड और बिहार के बीच सांस्कृतिक पुल का काम करता है, जिससे दोनों प्रदेशों के लोगों के बीच आपसी समझ और सहयोग की भावना और भी प्रगाढ़ होती है।

Original Title: विश्वकर्मा के जयकारों से गूंजा पंडाल, बिहार से आए भोजपुरी कलाकारों ने मोहा मन

Original Content: बिहारी महासभा उत्तराखंड, देहरादून द्वारा आयोजित विश्वकर्मा पूजनोत्सव इस बार भक्ति और भोजपुरी की मिट्टी की खुशबू से सराबोर रहा। हिंदू नेशनल इंटर कॉलेज के प्रांगण में सजा भव्य पंडाल देर शाम तक “जय श्री विश्वकर्मा” के जयकारों से गूंजता रहा। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बिहार से विशेष रूप से बुलाए गए भोजपुरी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य जागरण रहा।

बिहार से आए भोजपुरी कलाकारों ने मोहा मन

उल्लेखनीय है कि बिहारी महासभा पिछले 20 सालों से देहरादून में सामाजिक स्तर पर जन-जागरण कर रही है। महासभा द्वारा उत्तराखंड की धरती पर समाज के सहयोग से बिहार की संस्कृति को बचाए रखने के लिए लगातार कई प्रयास किए गए हैं। सभा द्वारा हर साल छठ पूजा, बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा, विश्वकर्मा दिवस, हरतालिका तीज जैसे बड़े सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही बीच-बीच में रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जांच शिविर जैसे जनहित के कार्यक्रम भी कराए जाते हैं, ताकि समाज सेवा और अपनी जड़ों से जुड़ाव दोनों बना रहे। विश्वकर्मा पूजनोत्सव भी इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

लोक गायिका प्रियंका मौर्या ने दी प्रस्तुति

जागरण की शुरुआत में बिहार की प्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायिका प्रियंका मौर्या ने जब भगवान विश्वकर्मा के भजनों की प्रस्तुति दी, तो पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। उनके द्वारा गाए गए “चलऽ हो विश्वकर्मा बाबा के धाम” और “बाबा विश्वकर्मा करिहें बेड़ा पार” जैसे भजनों पर दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए।

पदाधिकारियों ने रखे विचार

अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा, “आज पंडाल में जो ऊर्जा दिखी, वो बताती है कि हम देहरादून में रहते हुए भी पूर्वांचल और बिहार को दिल में जिंदा रखे हैं। 20 साल की हमारी मेहनत आज रंग ला रही है।” बिहार हमारी जन्मभूमि है और उत्तराखंड हमारी कर्म भूमि है हम समाज के हर वर्ग के लोगों से सहयोग लेकर उनके बीच रहकर आगे बढ़ रहे हैं।।

सचिव चंदन कुमार झा ने कहा, “भोजपुरी जागरण का उद्देश्य अपनी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना था और नंदिनी शर्मा जी ने इसे बखूबी पूरा किया।” संगठन हमेशा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम करते रहती है यही हमारी सभा की पहचान है ।

Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.