उत्तराखंड में घरेलू क्रिकेट सीजन के शुरू होने से पहले उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2026 की शुरुआत होने जा रही है। यह टूर्नामेंट 21 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक देहरादून के रायपुर स्थित राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इस बार पुरुष वर्ग में सात और महिला वर्ग में चार टीमें मैदान में उतरेंगी, जिससे स्थानीय युवा खिलाड़ियों को बड़े मंच पर अपनी क्षमताएँ दिखाने का अवसर मिलेगा। हालांकि इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवा प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है, फिर भी कुछ प्रश्न उठते हैं कि क्या यह पहल पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष है।
उत्तराखंड क्रिकेट का इतिहास विवादों से घिरा रहा है। राज्य ने बाहरी खिलाड़ियों को आकर्षित करने के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है, जहाँ सीनियर और अनुभवी खिलाड़ियों को युवा वर्ग को मार्गदर्शन देने के लिए चुना जाता है। यह मॉडल घरेलू क्रिकेट में कुछ हद तक सफल रहा है, परंतु टी‑20 लीग के स्तर पर अभी तक ठोस परिणाम नहीं दिखा है। 2018 से उत्तराखंड टीम घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग ले रही है; बाहरी खिलाड़ियों के प्रदर्शन को शायद ही कोई याद रखे, परंतु स्थानीय खिलाड़ियों की यादें क्रिकेट प्रेमियों के दिल में गहरी हैं।
उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2026 के लिए यशस्वी जायसवाल के भाई तेजस्वी जायसवाल को टिहरी टीम की कप्तानी सौंपी गई है। तेजस्वी का रिकॉर्ड उल्लेखनीय नहीं है; उन्होंने त्रिपुरा के लिए कुल 17 मैच खेले हैं और उनका औसत प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है। फिर भी उन्हें इस लीग में आयकॉन खिलाड़ी के रूप में शामिल किया गया है, जहाँ आकाश मधवाल, जगदीशा सुचित, कुणाल चंदेला, अवनीश सुधा, युवराज चौधरी और मयंक मिश्रा जैसे नाम भी सूचीबद्ध हैं। इस चयन से यह सवाल उठता है कि क्या उत्तराखंड में पर्याप्त स्थानीय प्रतिभा नहीं है, जिससे 29‑वर्षीय खिलाड़ी को प्रमुख भूमिका दी गई है।
लीग में पिथौरागढ़ हरिकेन्स, यूएसएन इंडियंस, नैनीताल टाइगर्स, ऋषिकेश रिवर किंग्स, हरिद्वार एल्मास, टिहरी टाइटंस और देहरादून वॉरियर्स जैसी टीमें भाग ले रही हैं। मूल निवास नियम के तहत पहले स्थानीय खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जानी थी, परंतु इस नियम का पालन कितना हुआ, यह स्पष्ट नहीं है। उत्तराखंड को मान्यता मिलने में लगभग दो दशकों का समय लगा, और अब यह देखना होगा कि संघ की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव आएगा या नहीं, जिससे घरेलू सीजन के बाद राज्य को गर्व महसूस हो या फिर हर साल की तरह खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सवाल ही बने रहें।
Original Title: उत्तराखंड में खेलेंगे यशस्वी जायसवाल के भाई तेजस्वी , क्या पहाड़ में खिलाड़ियों की कमी है !
Original Content: Uttarakhand News: Cricket: CAU: UPL 2026: उत्तराखंड में घरेलू क्रिकेट सीजन के शुरू होने से पहले उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2026 की शुरुआत होने जा रही है। UPL का तीसरा सीजन 21 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक देहरादून के रायपुर स्थित राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। इस बार पुरुष वर्ग में सात और महिला वर्ग में चार टीमें मैदान में उतरेंगी। वैसे इस टूर्नामेंट का मकसद स्थानीय युवा खिलाड़ियों को मौका देना है लेकिन पिक्चर पूरी तरह से सफेद नहीं है जो बताई जा रही है।
उत्तराखंड क्रिकेट का इतिहास वैसे भी विवादों के ईर्द-गिर्द रहा है। उत्तराखंड बाहर के खिलाड़ियों के लिए सबसे बेहतर विकल्प बन गया है। सीएयू की ओर से सीनियर और अनुभवी खिलाड़ियों को युवा खिलाड़ियों को बेहतर सीख देने लिए चुना जाता है और घरेलू क्रिकेट के लिए ये बात कही ना कही फिट भी बैठ जाती है लेकिन टी-20 लीग के लिए कुछ जम नहीं रहा है। उत्तराखंड टीम 2018 से घरेलू क्रिकेट खेल रही है और बाहर से आने वाले खिलाड़ियों के प्रदर्शन को शायद ही किसी को याद होगा लेकिन उत्तराखंड के स्थानीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन क्रिकेट फैंस को याद है।
उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2026 के लिए यशस्वी जायसवाल के भाई तेजस्वी जायसवाल को टिहरी टीम की कमान सौंपी गई है। वैसे तेजस्वी जायसवाल का प्रदर्शन ऐसा नही है कि उसकी वाहवाही की जाए । त्रिपुरा के लिए उन्होंने कुल 17 मैच खेले हैं और प्रदर्शन औसत से नीचे है। ऐसे में उत्तराखंड में पहले गोल्ड कप में जगह और क्रिकेट लीग में कप्तानी, इससे साफ अनुमान लगाया जा सकता है कि वो घरेलू क्रिकेट में उत्तराखंड के लिए खेल सकते हैं, फिलहाल इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।
क्रिकेट लीग 2026 के लिए तेजस्वी जायसवाल को आयकॉन खिलाड़ी के रूप में जोड़ा गया है। इस लिस्ट में आकाश मधवाल, जगदीशा सुचित, कुणाल चंदेला, अवनीश सुधा, युवराज चौधरी और मयंक मिश्रा का नाम भी शामिल है। इस बार पिथौरागढ़ हरिकेन्स, यूएसएन इंडियंस, नैनीताल टाइगर्स, ऋषिकेश रिवर किंग्स, हरिद्वार एल्मास, टिहरी टाइटंस और देहरादून वॉरियर्स टीम लीग का हिस्सा है। अब सवाल ये उठेगा कि क्या उत्तराखंड में खिलाड़ियों की कमी है कि 29 वर्षीय खिलाड़ी को लीग का हिस्सा बनाया गया। घरेलू क्रिकेट टीम चयन भी बार-बार सवालों के घेरे में रहती है।
वैसे मूल निवास का नियम पहले बनाया गया था और उसका आगे क्या हुआ ये किसी को नही पता। लेकिन उत्तराखंड को मान्यता मिलने में करीब दो दशक का समय लगा। ऐसे में पहला हक तो राज्य के युवाओं का ही बनता है। वैसे ही राज्य में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने जूनियर वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन वक्त के साथ वो गायब हो गए। अब देखना होगा कि क्या संघ की वर्किंग में कोई बदलाव आते हैं। जिससे घरेलू सीजन के खत्म होने के बाद हम गर्व महसूस करें या फिर हर वर्ष की तरह खिलाड़ियों का प्रदर्शन को फैंस को खुश करेगा लेकिन संघ के फैसले सवालों के घेरे में रहेंगे।
