हरिद्वार में साइबर अपराधियों ने अपने ठगी के तरीके को और भी चतुर बना दिया है। अब वे बड़े सरकारी अधिकारियों और न्यायिक पदाधिकारियों की तस्वीरों का उपयोग करके नकली व्हाट्सएप प्रोफ़ाइल तैयार कर रहे हैं, जिससे पीड़ितों का भरोसा जीत कर उनसे पैसे की मांग की जाती है। हाल ही में एक मामले में, अपराधियों ने जिला जज की आधिकारिक तस्वीर को लेकर एक झूठा व्हाट्सएप अकाउंट बना दिया, जिससे कई नागरिकों को यह लगा कि वे न्यायालय के प्रतिनिधि से सीधे संपर्क में हैं।
फ्रॉडस्टर्स इस अकाउंट से विभिन्न बहानों के तहत धन की मांग करते हैं—जैसे “क़रज की वसूली”, “संपत्ति की बकाया राशि” या “आवश्यक सरकारी दस्तावेज़ों की प्रोसेसिंग फीस”। कई बार वे तत्काल भुगतान करने के लिए तेज़ ट्रांसफ़र या मोबाइल वॉलेट लिंक भेजते हैं, जिससे पीड़ित तुरंत फँस जाते हैं।
पुलिस ने इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बताई हैं:
– किसी भी सरकारी या न्यायिक अधिकारी की फोटो से बना व्हाट्सएप अकाउंट को आधिकारिक मानने से पहले, संबंधित विभाग या न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन पर सत्यापन करें।
– अनजान नंबरों से आए वित्तीय अनुरोधों पर कभी भी व्यक्तिगत या बैंक विवरण न दें, विशेषकर यदि वे तत्काल भुगतान की मांग कर रहे हों।
– आधिकारिक दस्तावेज़ों में आम तौर पर व्यक्तिगत व्हाट्सएप नंबर नहीं होते; यदि ऐसा संदेश मिले तो तुरंत पुलिस को रिपोर्ट करें।
– संदेश में दिये गये लिंक पर क्लिक करने से पहले, URL को सावधानीपूर्वक जाँचें; अक्सर ये फ़िशिंग साइटों की ओर ले जाते हैं।
साइबर अपराध जांच विभाग ने बताया कि इस तरह के नकली प्रोफ़ाइल अक्सर कई दिनों तक सक्रिय रहते हैं, क्योंकि वे नियमित रूप से प्रोफ़ाइल तस्वीर और नाम बदलते रहते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध संदेश को तुरंत स्थानीय साइबर सेल या पुलिस को सूचित करें, ताकि आगे की जांच और संभावित पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल युग में व्यक्तिगत पहचान की सुरक्षा पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। सतर्क रहिए, सत्यापन कीजिए, और किसी भी अनपेक्षित वित्तीय अनुरोध को नज़रअंदाज़ करिए।
