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दीपावली की रात्रि में देहरादून स्टेशन पर भीड़ का दंगा, सुरक्षा बलों ने किया हस्तक्षेप

दीपावली के चहल-पहल भरे दिन, देहरादून रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ ने एक नाटकीय दृश्य रचा। गुरुवार को पूर्वांचल और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में सवार होने के लिए संघर्ष करते हुए यात्रियों के बीच इतनी मारामारी देखी गई कि प्लेटफार्म पर पैर रखने की जगह भी नहीं बची। ट्रेन आने के साथ ही लोग कोचों की ओर दौड़ पड़े, जिससे धक्का-मुक्की के बीच एक क्षणिक अफरातफरी जैसी स्थिति उत्पन्न हुई।

सबसे जमीनी भीड़ राप्ती गंगा एक्सप्रेस में देखने को मिली। स्टेशन पर पहुँचते ही यात्री जनरल कोचों में चढ़ने के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने लगे। पहले से भरे डिब्बों में यात्रियों को पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही थी, और कोच के दरवाजों पर भीड़ जमा हो गई। इस स्थिति ने किसी के गिरने या चोटिल होने के खतरे को बढ़ा दिया।

स्थिति बिगड़ती देख जीआरपी और आरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाला। उन्होंने यात्रियों को संभालते हुए भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सका।

गुरुवार दोपहर 12:45 बजे सूबेदारगंज जाने वाली लिंक एक्सप्रेस स्टेशन पर पहुँची, पर यात्रियों को सवार होने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। लगभग डेढ़ बजे ट्रेन रवाना हुई, पर प्लेटफार्म पर भीड़ कम नहीं हुई। 2:17 बजे राप्ती गंगा एक्सप्रेस के आगमन पर स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई। ट्रेन रुकते ही यात्री सीट की उम्मीद में जनरल कोचों की तरफ दौड़ पड़े, जिससे धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

इस भीड़भाड़ में महिला यात्रियों और बालिकाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। भीड़ के दबाव में उनके लिए ट्रेन के डिब्बों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। ऐसे समय में जीआरपी और आरपीएफ के जवानों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया, महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित तरीके से कोच तक पहुँचाया और ट्रेन में चढ़ने में सहायता की।

दीपावली और छठ के दौरान पूर्वांचल और बिहार जाने वाले यात्रियों की संख्या हर साल बढ़ जाती है। इसके बावजूद ट्रेनों में भीड़ का दबाव कम करने के इंतजाम पर्याप्त नहीं दिखते। जनरल कोचों में क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने से सफर मुश्किल होने के साथ सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है।

इस घटना से रेलवे की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। त्योहारों के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त संख्या को देखते हुए विशेष ट्रेनों, अतिरिक्त कोचों और स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की ज़रूरत है, ताकि यात्रियों को घर पहुँचने के लिए जोखिम भरे हालात का सामना न करना पड़े।

Original Title: दीपावली पर ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं! जान जोखिम में डालकर सफर, राप्ती गंगा में मची अफरातफरी

Original Content: Dehradun Railway Station | Diwali Rush | Train Passengers : दीपावली पर अपने घर पहुंचने की चाह में देहरादून रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गुरुवार को पूर्वांचल और बिहार जाने वाली ट्रेनों में सवार होने के लिए यात्रियों के बीच ऐसी मारामारी देखने को मिली कि प्लेटफार्म पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। ट्रेन आते ही सीट पाने के लिए लोग कोचों की तरफ दौड़ पड़े। इस दौरान धक्का-मुक्की के बीच कुछ देर के लिए अफरातफरी जैसे हालात बन गए।सबसे ज्यादा भीड़ राप्ती गंगा एक्सप्रेस में देखने को मिली। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही यात्री जनरल कोचों में चढ़ने के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करने लगे। पहले से भरे डिब्बों में यात्रियों को पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही थी। हालात ऐसे हो गए कि कोच के दरवाजों पर भी लोगों की भीड़ जमा हो गई। ऐसे में किसी यात्री के गिरने या चोटिल होने का खतरा बढ़ गया।स्थिति बिगड़ती देख जीआरपी और आरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाला। जवानों ने यात्रियों को संभालने के साथ भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया…जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।गुरुवार दोपहर से ही रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। दोपहर 12:45 बजे सूबेदारगंज जाने वाली लिंक एक्सप्रेस पहुंची तो उसमें सवार होने के लिए यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। करीब डेढ़ बजे ट्रेन रवाना हुई, लेकिन प्लेटफार्म पर भीड़ कम नहीं हुई।इसके बाद दोपहर 2:17 बजे राप्ती गंगा एक्सप्रेस के पहुंचते ही स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई। ट्रेन रुकते ही यात्री सीट की उम्मीद में जनरल कोचों की तरफ दौड़ पड़े। पहले से भरे डिब्बों में जगह बनाने के लिए धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कई यात्रियों को कोच के अंदर पहुंचने तक में परेशानी हुई।स्टेशन पर बढ़ती भीड़ के बीच महिला यात्रियों और बालिकाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। भीड़ के दबाव में उनके लिए ट्रेन के डिब्बों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। ऐसे समय में जीआरपी और आरपीएफ के जवानों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। जवानों ने महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित तरीके से कोच तक पहुंचाया और ट्रेन में चढ़ने में सहायता की।दीपावली और छठ पर्व के दौरान पूर्वांचल और बिहार जाने वाले यात्रियों की संख्या हर साल बढ़ जाती है। इसके बावजूद ट्रेनों में भीड़ का दबाव कम करने के इंतजाम पर्याप्त नजर नहीं आते। जनरल कोचों में क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने से सफर मुश्किल होने के साथ सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है।ऐसे में रेलवे की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। त्योहारों के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त संख्या को देखते हुए विशेष ट्रेनों, अतिरिक्त कोचों और स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की जरूरत है…ताकि यात्रियों को घर पहुंचने के लिए जोखिम भरे हालात का सामना न करना पड़े।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।