दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना की रक्षा के कर्तव्य पर खड़े उत्तराखंड के नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। काशीपुर के रहने वाले रावत, 16वीं गढ़वाल राइफल्स की बी कंपनी में तैनात थे और कठोर ठंड व अत्यधिक ऊँचाई के बीच ड्यूटी कर रहे थे, जब अत्यधिक ठंडे तापमान ने उनके मस्तिष्क में रक्त का थक्का बना दिया। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा कमांड अस्पताल, चंडीगढ़ ले जाया गया, जहाँ दो महीने तक जीवनरक्षक उपचार जारी रहा, परन्तु सभी प्रयासों के बावजूद वह इस जंग को हारकर इस दुनिया से विदा हो गए।
रात के सायंकाल में उनका निर्जीव शरीर काशीपुर के घर पहुँचा, जहाँ परिवार, पड़ोसी और कई पूर्व सैनिकों ने शोक की चीत्कारों के साथ उनका अंतिम दर्शन किया। शोकाकुल माँ राजेश्वरी, पिता ख्याति सिंह रावत, पत्नी भारती, पुत्र समीर और बेटी दीया ने इस दुखद क्षण को सहन करने की ताकत जुटाने की कोशिश की। स्थानीय लोगों ने फूलों की वर्षा कर शहीद को श्रद्धांजलि दी और ढेलापुर घाट पर सेना के जवानों ने गरिमा भरा गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया, जिससे उनके पराक्रम को सम्मानित किया गया। अंत में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
रावत के शहादत को याद रखने के लिए काशीपुर के पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष चंद्र सिंह रावत ने कहा, “देश की सुरक्षा में उनका बलिदान हमेशा हमारे दिलों में अंकित रहेगा।” इस शोक सभा में विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, महापौर दीपक बाली, पार्षद संजय शर्मा, एसडीएम अभय प्रताप सिंह, तहसीलदार पंकज चंदोला एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सेना के स्टेशन हेडक्वार्टर के फ्यूनरल गार्ड, 16वीं गढ़वाल राइफल्स के जवान, स्थानीय पुलिस और काशीपुर, कुंडेश्वरी व पीरूमदारा के पूर्व सैनिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी शहीद को अंतिम विदाई दी, जिससे इस क्षण की गरिमा और सम्मान में इजाफा हुआ। उनका बलिदान न केवल काशीपुर, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक अमिट प्रेरणा बनकर रहेगा।
Original Title: सियाचिन में शहीद हुए उत्तराखंड के लाल रमेश सिंह रावत, पीछे छोड़ गए पत्नी और दो बच्चे
Original Content: Siachen Glacier | Indian Army | RameshSinghRawat | Uttarakhand : देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हुए उत्तराखंड के एक और वीर सपूत ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर में तैनात काशीपुर निवासी नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत भारतीय सेना की 16वीं गढ़वाल राइफल्स की बी कंपनी में तैनात थे। सियाचिन में बेहद कम तापमान और कड़ाके की ठंड के बीच ड्यूटी करते समय उनके मस्तिष्क में खून का थक्का जम गया था। उनकी हालत गंभीर होने पर सेना ने हेलीकॉप्टर से उन्हें कमांड अस्पताल चंडीगढ़ पहुंचाया था।
वहां पिछले दो महीने से उनका उपचार चल रहा था। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए…लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वह जिंदगी की जंग हार गए।
गुरुवार सुबह जैसे ही नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा परिवार में चीख-पुकार मच गई। अपने वीर सपूत को अंतिम बार देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पूर्व सैनिक और परिचित उनके घर पहुंचे।
इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। रास्ते में लोगों ने पुष्प वर्षा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। ढेलापुर घाट पर सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत अपने पीछे मां राजेश्वरी, पिता ख्याति सिंह रावत, पत्नी भारती, पुत्र समीर और पुत्री दीया को छोड़ गए हैं। उनके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पूर्व सैनिक संगठन काशीपुर के अध्यक्ष चंद्र सिंह रावत ने कहा कि देश की रक्षा में रमेश सिंह रावत का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
उनकी अंतिम विदाई में विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, महापौर दीपक बाली, पार्षद संजय शर्मा, एसडीएम अभय प्रताप सिंह, तहसीलदार पंकज चंदोला सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सेना के स्टेशन हेडक्वार्टर के फ्यूनरल गार्ड, 16वीं गढ़वाल राइफल्स के जवानों, स्थानीय पुलिस और काशीपुर, कुंडेश्वरी व पीरूमदारा के पूर्व सैनिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
