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अखिलेश यादव द्वारा उत्तराखंड के लोगों को “घुसपैठिया” कहने के आरोप पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया और इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड न केवल देवभूमि है, बल्कि वीरभूमि भी है। धामी ने स्पष्ट किया कि इस पवित्र धरती ने देश को संत, सैनिक और राष्ट्रसेवा में समर्पित अनेक व्यक्तित्वों से नवाज़ा है, और ऐसे में उत्तराखंडियों को “घुसपैठिया” कहना प्रदेश के स्वाभिमान और संघर्ष का अपमान है।
साक्षात्, धामी ने उत्तराखंड के आंदोलन के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने 1990 के दशक में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए रामपुर तिराहा में हुए आंदोलन के दौरान गोलीबारी की याद दिलाई। उस समय, राज्य के मांगकारियों पर गोलियाँ चलायी गयीं, और यह घटना आज भी उत्तराखंडी लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ती है। धामी ने कहा कि एक ओर आंदोलनकारियों को गोलीबारी का सामना करना पड़ा था, वहीं आज के दिन उन्हें “घुसपैठिया” कहे जाने का सामना करना पड़ रहा है, जो कि भावनात्मक रूप से अत्यंत अस्वीकार्य है।
इसके अलावा, धामी ने कांग्रेस पार्टी से सवाल उठाया कि क्या वे अपने राजनीतिक सहयोगी अखिलेश यादव के इस बयान का समर्थन करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे इस तरह की टिप्पणी को स्वीकार करते हैं या नहीं, ताकि उत्तराखंड की जनता को यह विश्वास हो सके कि उनका सम्मान और गौरव किसी भी समय खतरे में नहीं है।
अंत में, धामी ने दृढ़ता से कहा कि उत्तराखंड की जनता अपने इतिहास, संघर्ष और बलिदान को कभी नहीं भूलेगी। वे यह भी जोड़ते हैं कि राज्य की शान और स्वाभिमान को किसी भी बाहरी आलोचना से बचाने के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।
