उत्तराखंड के नव नियुक्त राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने शनिवार को राज्यपाल पद की शपथ लेने के बाद अपने आध्यात्मिक यात्रा का आरम्भ बदरीनाथ और केदारनाथ धामों से किया। दोनों पवित्र स्थलों पर उन्होंने श्रद्धा‑भाव से दर्शन किया, पूजा‑अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि तथा खुशहाली की प्रार्थना की। यह दौरा उनके कार्यकाल की पहली आध्यात्मिक यात्रा के रूप में दर्ज किया गया, जिससे उन्होंने उत्तराखंड के चार धामों में से दो की पवित्रता को अपने कर्तव्य में शामिल किया।
भव्य हिमालयी पृष्ठभूमि में स्थित बदरीनाथ, जो चार धामों में से एक है, पर बिसेन ने कहा, “बाबा केदारनाथ की कृपा से आज यहाँ दर्शन का सौभाग्य मिला। मैं देवभूमि उत्तराखंड को नमन करता हूँ और चार धामों की पवित्र भूमि पर राज्यपाल के रूप में सेवा करने का अवसर मिलने के लिए शीर्ष नेतृत्व के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।” केदारनाथ में अपने प्रवचन में उन्होंने इस पावन स्थल की महत्ता को दोहराते हुए कहा, “इस धरती की पवित्रता को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसे संजोना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”
राज्यपाल ने अपने प्रवचन को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के समक्ष विशेष अपील के साथ समाप्त किया। उन्होंने सभी यात्रियों से अनुरोध किया कि वे उत्तराखंड को स्वच्छ, हरित और नशामुक्त बनाए रखने में सक्रिय योगदान दें। बिसेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ एवं ‘नशामुक्त भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को उद्धृत करते हुए कहा, “हमारी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा और हमारी परम्पराओं को संजोना हमारे सामूहिक दायित्व में शामिल है।” इस प्रकार, राज्यपाल ने आध्यात्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ते हुए उत्तराखंड के विकास एवं संरक्षण के लिए अपने प्रतिबद्धता को दृढ़ किया।
