अधिवक्ता पर लगातार धमकी: नयी चेतावनी ने कानूनी समुदाय को चौंकाया

नैनीताल हाईकोर्ट के अधिवक्ता नवनीश नेगी को पहले मिली धमकी भरी चिट्ठी के बाद, अब पूर्व यूकेडी नेता आशुतोष नेगी को भी इसी तरह का खतरा मिला है। इस बार भी चिट्ठी में उर्दू/अज्ञात भाषा में लिखा हुआ था: “मैं हूं, यमराज़ पुत्र, तुमने जो भी पाप किए हैं, उन सबके लिए पश्चाताप करो। क्योंकि तुम्हारा अंत निकट है…” और आगे यह चेतावनी दी गई कि “पहले तुम्हारा एक्सीडेंट होगा, फिर तुम्हारे इलाके में कीड़े‑मकोड़े फैल जाएंगे, और अंत में तुम्हें दिल का दौरा पड़ जाएगा।” इस तरह की डरावनी भाषा ने कानूनी पेशे में फिर से चिंता पैदा कर दी है।

पिछले कुछ दिनों में इसी तरह की धमकियाँ भी अधिवक्ताओं को मिली हैं। एक अधिवक्ता, जो अंकिता भंडारी के केस की पैरवी कर रहा था, उसे भी एक अशुभ पत्र मिला, जिसमें समान प्रकार के अलौकिक और हिंसक भविष्यवाणियाँ भरी हुई थीं। इस श्रृंखला के घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि कानूनी कार्य में लगे पेशेवरों पर अब लगातार खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

इन घटनाओं के कारण कानूनी समुदाय में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। अधिवक्ताओं ने धामी सरकार से तत्काल “एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट” लागू करने की मांग की है। वे तर्क देते हैं कि कई राज्यों में पहले से ही ऐसे कानून मौजूद हैं जो वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, और अब उत्तराखंड में भी इसी तरह के प्रावधान की आवश्यकता है। “हमारी सुरक्षा के बिना न्याय व्यवस्था का मूल आधार ही कमजोर हो जाता है,” एक वकील ने कहा।

साथ ही, आशुतोष नेगी और नवनीश नेगी के बीच के संबंध पर भी सवाल उठ रहे हैं। दोनों का परिवारिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि समान है, और दोनों ने अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। परंतु, इन धमकी भरे पत्रों के आगमन से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी वकील के खिलाफ ऐसे कार्य कानूनी पेशे की प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा हैं।

कानूनी अधिकारियों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि वकीलों को बिना भय के अपना पेशा निभाने का अधिकार मिले। इस बीच, अधिवक्ताओं को अपनी सुरक्षा के लिए अधिक सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है, और सरकार को भी जल्द से जल्द “एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट” को लागू करने के लिए क़दम उठाने चाहिए।