हरिपुर कालसी, उत्तराखंड के हनोल‑बावर क्षेत्र में बुधवार को माँ यमुना के जयकारों के बीच एक भव्य धार्मिक‑सांस्कृतिक महोत्सव का मंचन हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष रूप से “आशीर्वाद का दीया” कार्यक्रम के तहत यमुना घाट पर 2100 दीप जलाकर तट को उज्ज्वल किया और साथ ही माँ यमुना की नई प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर यमुना आरती भी संपन्न हुई, जिसमें धामी जी ने साधु‑संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय जनसमुदाय के साथ भागीदारी की, जिससे घाट की आध्यात्मिक छटा और भी निखर गई।
धामी ने इस समारोह में हरिघाट का आधिकारिक लोकार्पण किया और माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास किया, जिससे कालसी की धार्मिक पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि कालसी का इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक परम्पराएँ इस क्षेत्र को विशेष बनाती हैं, और इन नई संरचनाओं से स्थानीय समुदाय को आध्यात्मिक एवं सामाजिक लाभ दोनों मिलेंगे। कार्यक्रम में विधायक मुन्ना सिंह चौहान, सचिव रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि और बड़ी संख्या में साधु‑संत व स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।
साथ ही, मुख्यमंत्री ने जौनसार‑बावर क्षेत्र के विकास के लिए “हनोल मास्टर प्लान” को मंजूरी देते हुए 150 करोड़ रुपये की राशि घोषित की। इस योजना के तहत धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे लाखामंडल सहित अन्य ऐतिहासिक स्थल भी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे। धामी ने कहा कि पर्यटन के विस्तार से होमस्टे, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, परिवहन और खान‑पान जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं और व्यवसायियों को स्वरोजगार की संभावनाएँ मिलेंगी।
धामी ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परम्पराओं, वास्तुशिल्प और प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित रखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चारधाम के अलावा राज्य के अन्य पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को भी बेहतर सुविधाओं से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। इस प्रकार, कालसी, हनोल और लाखामंडल सहित जौनसार‑बावर क्षेत्र को धार्मिक और पर्यटन के दोहरे दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक पर्यटन के साथ जोड़ा जा सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।
