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देहरादून में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरिश रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी ने राज्य की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। ईडी ने बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद करने का दावा किया, जबकि रावत ने स्वीकार किया कि जीना उनके कार्यकाल में OSD रहे और “विनम्र व निष्ठावान सहयोगी” थे। उन्होंने कहा, यदि ग्राम सेवक भर्ती या OMR शीट में छेड़छाड़ के कोई प्रमाण मिलते हैं, तो वह “इस तथाकथित दुस्साहसिक कृत्य से लज्जित” होंगे और यह स्पष्ट किया कि चुनावों से ठीक पहले एक विशेष “नरेटिव” बनाने के लिए इस घर पर केंद्रीय एजेंसियों की दस्तक दी गई।
ईडी कार्रवाई के बाद रावत ने दो अलग‑अलग बयानों और भावनात्मक सोशल‑मीडिया पोस्ट के माध्यम से राजनीतिक हलचल को और तीव्र कर दिया। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अभियान (जैसे “छात्रों की गूंज”) को अपनी वजह से कोई नुकसान न पहुँचाने के लिए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसी) की कार्यकारिणी तथा कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफ़ा देने की पेशकश की। फिर भी उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी की सदस्यता मेरे ख़ून और हड्डियों में है… वह तो मेरे साथ ही स्वर्ग में भी जाएगी,” और ईश्वर से अपनी “ख़ता” पूछते हुए अकेले सत्य की नाव पर खड़े होने का इशारा किया।
रावत ने अपने तीन साल के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल का बचाव करते हुए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC), मेडिकल भर्ती बोर्ड और शिक्षा भर्ती बोर्ड की स्थापना का हवाला दिया, जिससे 42,000 से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियाँ हुईं। उन्होंने UKSSSC के विवादित चेयरमैन की नियुक्ति पर भी स्पष्टीकरण दिया, यह बताते हुए कि पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी ने दो बार उनसे मिलकर परामर्श किया था। रावत ने सार्वजनिक रूप से अपील की कि यदि भर्ती प्रक्रिया में उनकी किसी भी तरह की संलिप्तता का प्रमाण हो, तो उसे CBI, ED या पुलिस को सौंप दिया जाए, और दोषी पाए जाने पर क़ानून का दंड हो।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने ईडी और CBI को “स्वतंत्र एजेंसियाँ” घोषित करते हुए कहा कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई होगी, चाहे वे किसी भी दल से हों, और रावत के इस्तीफ़े को “जनप्रियता हासिल करने के लिए नाटक” कहा। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सवाल उठाया कि “10 साल से सोई हुई ईडी को चुनाव आते ही केंद्रीय इशारे पर क्यों जगाया गया?” और रावत को पार्टी के वरिष्ठतम नेता के रूप में पूरा समर्थन दिया। इस प्रकार, आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ईडी की कार्रवाई और रावत की तीव्र प्रतिक्रियाएँ उत्तराखंड में भ्रष्टाचार, भर्ती घोटालों और चुनावी रणनीतियों को नई दिशा दे रही हैं, जहाँ भाजपा इसे “शून्य सहनशीलता” के रूप में पेश कर रही है और कांग्रेस इसे “केन्द्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग” कहकर खारिज कर रही है।
**Original Title: ** छापेमारी, इस्तीफे की पेशकश और तीखे वार, हरीश रावत के बयानों से राजनीतिक घमासान
**Original Content: ** उत्तराखंड विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई के बाद आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर चरम पर पहुंच गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर हरीश रावत की सफ़ाई, संगठनात्मक पदों से इस्तीफ़े की पेशकश, भाजपा का पलटवार और कांग्रेस पार्टी का बचाव—इन चार चीजों ने प्रदेश के सियासी पारे को चढ़ा दिया है।
