उत्तराखंड के टनकपुर में सामाजिक न्याय और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर घटना हुई है, जहाँ पुलिस ने एक 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कठोर धाराओं के अलावा, पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पीड़िता की पहचान और उसकी निजता की रक्षा के लिए उसकी निजी जानकारी गोपनीय रखी गई है, ताकि उस पर एक बार फिर से सामाजिक दबाव न पड़े। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत अपराध है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे कुछ वितुष्ट व्यक्ति नाबालिगों के भरोसे का दुरुपयोग करके उन्हें न केवल शारीरिक बलात्कार का शिकार बनाते हैं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक रूप से भी नष्ट करने की प्रयत्न करते हैं।
पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस चालू की शिकार बनी पीड़िता के साथ घटना करीब डेढ़ वर्ष पुरानी है। मनिहारगोठ निवासी आरोपी निषाद खान ने अपनी वास्तविक धार्मिक पहचान को पूरी तरह से छिपाकर नाबालिग से दोस्ती की और धीरे-धीरे उसे अपने विश्वास में ले लिया। इस भरोसे का दुरुपयोग करते हुए, आरोपी ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। जब पीड़िता को कुछ समय बाद आरोपी की वास्तविक पहचान और उसकी धार्मिक affiliation के बारे में पता चला, तो स्थिति और भी गंभीर हो गई। आरोप है कि अपनी पहचान सामने आने के बाद भी आरोपी ने पीड़िता को छोड़ने की बजाय, उस पर धर्म परिवर्तन कर निकाह करने का अत्यधिक दबाव बनाया।
सबसे निंदनीय बात यह है कि जब पीड़िता ने इस अनैतिक और गैर-कानूनी मांग का विरोध किया, तो आरोपी ने उसे और भी ज्यादा डराने के लिए उसकी निजी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की खूबसूरत धमकी दी। यह धमकी पीड़िता और उसके परिवार के लिए एक बड़ा संकट बनकर उभरी, जिसके बाद पीड़िता के स्वजन ने पुलिस को आश्रय देते हुए शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 69, 78 और 351(2) उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 और 6 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मामले की त्वरित कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है और अब इसके खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। कोतवाल चेतन सिंह रावत ने बताया कि जांच टीम में उप निरीक्षक गुरविंदर कौर, हेड कांस्टेबल नवींद्र मेहरा, कांस्टेबल हितेंद्र वर्मा और शोभा शर्मा शामिल हैं, जो सभी संबंधित साक्ष्य जुटा रहे हैं। यह की गई कार्रवाई यह स्पष्ट संदेश देती है कि राज्य में नाबालिगों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के कानूनों का पालन कराने के लिए पुलिस कड़ा रुख अपना रही है। इस घटना से समाज को यह सबक मिलता है कि नाबालिगों की रक्षा के लिए परिवारों और समाज की सतर्कता का विशेष महत्व है, और ऐसे काल्पनिक भरोसे में आकर किसी भी अनैतिक मांग को स्वीकार करना अंधेरों में कूदने जैसा है।
