26 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद, गृह मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर के नेतृत्व में एक हाई‑लेवल कमेटी (HLCDC) गठित की। इस पैनल ने राज्यों से पिछले पंद्रह वर्षों के धर्म‑वार डेटा की माँग की है, जो कि भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढाँचे के कारण पहले कभी व्यवस्थित रूप से नहीं रखा गया था। पैनल की रिपोर्ट में 35 जटिल प्रश्नों की सूची है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी और बौद्ध समुदायों के लिए अलग‑अलग आँकड़ों की माँग की गई है।
माँगी गई जानकारी में जन्म प्रमाणपत्र और वाहन पंजीकरण के धर्म‑वार आँकड़े, स्कूल नामांकन और संपत्ति लेन‑देनों का धर्म के आधार पर विवरण, पिछले 15 सालों में बने मंदिर, मस्जिद और चर्च का जिला‑वार डेटा तथा उनकी GIS मैपिंग, तथा आधार और वोटर आईडी कार्डों में धर्म‑वार बदलाव की विस्तृत रिपोर्ट शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जन्म प्रमाणपत्र को छोड़कर किसी भी सरकारी विभाग में धर्म के आधार पर आँकड़े रखना असंभव है, क्योंकि अधिकांश रिकॉर्ड में यह जानकारी दर्ज नहीं होती।
इस माँग को लेकर राज्यों ने आक्रोश व्यक्त किया है। पैनल ने उन जिलों की पहचान करने के लिए भी कहा है जहाँ स्कूल दाखिलों के आँकड़े ऐतिहासिक जन्म दरों से मेल नहीं खाते, बिना पारिवारिक रिकॉर्ड के बने वोटर आईडी कार्डों के धर्म‑वार विवरण, सीमावर्ती इलाकों, औद्योगिक केंद्रों, शहरों और 5वीं व 6ठी अनुसूची वाले ट्राइबल क्षेत्रों में धार्मिक संतुलन में बदलाव, तथा आदिवासी समुदायों के बीच धर्मांतरण से जुड़ी इंटेलिजेंस रिपोर्ट भी माँगी है।
ऐसी माँगें 2005 के ‘सच्चर कमेटी’ की याद दिलाती हैं, जब यूपीए सरकार ने मुस्लिम समुदाय की सामाजिक स्थिति पर अध्ययन के लिए आयोग बनाया था, जिसे बीजेपी ने असंवैधानिक और विभाजनकारी बताया था। आज की स्थिति में भी वही चुनौती बनी हुई है—क्योंकि धर्म के आधार पर आँकड़े पहले कभी दर्ज नहीं किए गए थे, तो उन्हें रातों‑रात कैसे तैयार किया जाए? इस नए आदेश ने देश के प्रशासनिक ढाँचे में हलचल मचा दी है, और राज्यों को यह तय करना है कि वे इस मांग को कैसे पूरा करें।
Original Title: केंद्र की हाई लेवल कमेटी ने मांगा 15 साल का धर्मवार डेटा, राज्य सरकारों की उड़ी नींद
Original Content: जनसांख्यिकी (Demographics) बदलावों का अध्ययन करने के लिए गठित केंद्रीय गृह मंत्रालय की हाई-लेवल कमेटी (HLCDC) के एक नए कदम ने राज्य सरकारों की नींद उड़ा दी है। इस हाई-लेवल पैनल ने राज्यों से पिछले 15 सालों का धर्म-वार (Religion-wise) डेटा मांगा है। अब परेशानी यह है कि राज्यों के पास इस तरह की कोई तैयार सूची ही नहीं है, क्योंकि आमतौर पर सरकारी विभाग इस आधार पर जानकारी रखते ही नहीं हैं। …
