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उत्तराखंड के यूनानी मेडिकल कॉलेज पर 1 करो रुपये जुर्माना और मान्यता रद्द, 60 सीटें बंद

हरिद्वार के पदार्था में स्थित उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पर हाल ही में हुए निरीक्षण में शिक्षकों की नियुक्ति, वास्तविक उपस्थिति और बायोमेट्रिक रिकॉर्डिंग में गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) की टीम ने जून में कॉलेज का दौरा किया और पाया कि 20 शिक्षकों के नाम पर दाखिल रिकॉर्ड में उनके वास्तविक कार्यकाल और कक्षा में उपस्थिति का कोई ठोस प्रमाण नहीं था। इसके अलावा, आधार‑जुड़ी बायोमेट्रिक हाज़िरी व्यवस्था में भी गड़बड़ियाँ पाई गईं, जिससे कॉलेज के शैक्षणिक मानक पर प्रश्न उठे।

इन सब साक्ष्यों के आधार पर, राष्ट्रीय आयोग ने 2026‑27 शैक्षणिक सत्र के लिए यूनानी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी है और 1 करो रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। यह निर्णय बीयूएमएस (बंगाली यूनानी मेडिकल स्कूल) की 60 सीटों पर भी असर डालता है, जिन पर प्रवेश प्रक्रिया रुक गई है। कॉलेज द्वारा उपस्थिति के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत की गई सीसीटीवी फुटेज में संपादन और एक ही क्लिप को बार‑बार चलाने के आरोप भी सामने आए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि प्रबंधन ने रिकॉर्डिंग में फेरबदल करने की कोशिश की थी।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिवकुमार बरनवाल ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि आयोग के निर्देशों के अनुसार सभी प्रक्रियाएँ पूरी की जा रही हैं। यह घटना उत्तराखंड का एकमात्र यूनानी मेडिकल कॉलेज होने के नाते चिकित्सा शिक्षा में निर्धारित मानकों और निगरानी व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करती है।

छात्रों के लिए यह स्थिति अनिश्चितता लेकर आई है, क्योंकि 60 बीयूएमएस सीटों पर दाखिले को रोक दिया गया है। अब उन्हें आयोग और विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा, ताकि वे अपनी पढ़ाई की योजनाओं को आगे बढ़ा सकें। इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि पारदर्शिता और शैक्षणिक अखंडता को बनाए रखने के लिए सख्त निरीक्षण और कड़ाई से नियम लागू करने की आवश्यकता है।

Original Title: उत्तराखंड: यूनानी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द, 1 करोड़ का जुर्माना

Original Content: Uttarakhand News | BUMS Admission | Medical College : हरिद्वार के पदार्था स्थित उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में शिक्षकों की नियुक्ति और उपस्थिति से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद राष्ट्रीय आयोग ने संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेज की मान्यता रद्द करने और एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही बीयूएमएस की 60 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हुई है। मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की टीम ने जून में कॉलेज का निरीक्षण किया था। इस दौरान रिकॉर्ड में दर्ज 20 शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति और कॉलेज में उनकी भूमिका को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। जांच में शिक्षकों की आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था में भी गड़बड़ियां पाई गईं। उपस्थिति के प्रमाण के तौर पर कॉलेज की ओर से सीसीटीवी फुटेज भी दिए गए। आरोप है कि इन वीडियो में संपादन और एक ही फुटेज को बार-बार चलाने जैसी छेड़छाड़ की गई थी। जांच में सामने आई इन खामियों के बाद आयोग ने संस्थान पर कार्रवाई की। आयोग के आदेश के बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कॉलेज की बीयूएमएस की सभी 60 सीटों पर दाखिले रोक दिए गए हैं। इससे यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के सामने अनिश्चितता पैदा हो गई है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिवकुमार बरनवाल ने आयोग के निर्देशों और संस्थान की मान्यता से जुड़ी कार्रवाई की पुष्टि की है। उत्तराखंड का यह इकलौता यूनानी मेडिकल कॉलेज है। ऐसे में यहां सामने आई गड़बड़ियों ने मेडिकल शिक्षा में निर्धारित मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस कार्रवाई का असर कॉलेज के संचालन के साथ-साथ दाखिले की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर भी पड़ेगा। प्रवेश से जुड़ी आगे की स्थिति के लिए विद्यार्थियों को आयोग और संबंधित विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

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