उत्तराखंड शासन ने उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य के विभिन्न विभागों को निर्देश दिया गया है कि अनुबंध पत्र के हस्ताक्षर न हो पाने की वजह से उपनल कर्मचारियों का वेतन या मानदेय रोका नहीं जाएगा। इस आदेश के अनुसार, जिन कर्मचारियों के अनुबंध अभी तक निष्पादित नहीं हुए हैं, उन्हें पूर्व स्थापित व्यवस्था के तहत नियमित वेतन जारी किया जाएगा, जिससे हजारों कर्मचारियों को तत्काल राहत मिली है।
यह आदेश सैनिक कल्याण अनुभाग के सचिव युगल किशोर पन्त द्वारा राज्य के सभी प्रमुख अधिकारियों, विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया। पत्र में बताया गया कि कुछ विभागों ने अनुबंध की देरी को बहाना बनाकर कर्मचारियों के वेतन, जिसमें महंगाई भत्ता सहित, को रोक दिया था। सचिव पन्त ने इस कदम को “अनुचित और गलत” कहा और कहा कि अनुबंध प्रक्रिया में हुई किसी भी देरी का बोझ कर्मचारियों पर नहीं डाला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वेतन रोकना न केवल कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक हित के विरुद्ध भी है।
संबंधित पत्र में उच्च न्यायालय उत्तराखंड (नैनीताल) के जनहित याचिका संख्या 116/2018 (कुन्दन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य) के ऐतिहासिक फैसले का भी उल्लेख किया गया। न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में शासन ने पहले 3 फरवरी 2026 और 28 जुलाई 2026 को भी समान दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनमें विभागों को उपनल के माध्यम से तैनात पात्र कर्मचारियों की अनुबंध स्थिति की पूरी जानकारी शासन को प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। इन पूर्व निर्देशों के तहत अब सभी विभागों से अनुबंध संबंधी विवरण समय पर प्रस्तुत करने की मांग की जा रही है।
सचिव पन्त ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, गढ़वाल व कुमाऊं के मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को आदेश दिया है कि वे 3 फरवरी 2026 के सैनिक कल्याण विभाग के आदेश के अनुसार तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करें। इस स्पष्ट और कड़े रुख ने उपनल कर्मचारियों में आशा की नई लहर पैदा की है, और अब वे बिना किसी अनावश्यक देरी के अपना वेतन समय पर प्राप्त करेंगे।
Original Title: उपनल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत!, अनुबंध नहीं हुआ, फिर भी नहीं रुकेगा वेतन
Original Content: उत्तराखंड शासन ने राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि अनुबंध निष्पादित न होने की स्थिति में भी उपनल कर्मचारियों का मानदेय या वेतन नहीं रोका जाएगा।
जिन कर्मचारियों का अनुबंध पत्र हस्ताक्षरित नहीं हो सका है, उन्हें पूर्व से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार उपनल के माध्यम से नियमित वेतन का भुगतान किया जाता रहेगा।
उपनल कर्मियों का वेतन रोकने पर शासन सख्त
दरअसल ये आदेश सैनिक कल्याण अनुभाग, उत्तराखंड शासन के सचिव युगल किशोर पन्त को ओर से राज्य के सभी प्रमुख अधिकारियों, विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उत्तराखंड शासन के संज्ञान में यह बात आई थी कि राज्य के कुछ सरकारी विभागों द्वारा उपनल के माध्यम से कार्यरत पात्र कार्मिकों का वेतन सिर्फ इसलिए रोक दिया जा रहा था क्योंकि उनके अनुबंध पत्र समय पर हस्ताक्षरित या निष्पादित नहीं हो पाए थे।
सचिव युगल किशोर पन्त ने वेतन रोक को अनुचित बताया
विभागों द्वारा न्यूनतम महंगाई भत्ते सहित दिए जाने वाले वेतन आहरण पर रोक लगाए जाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सचिव युगल किशोर पन्त ने इसे अनुचित और गलत ठहराया है। शासन ने साफ शब्दों में कहा है कि अनुबंध प्रक्रिया में हो रही देरी का खामियाजा कर्मचारियों को वेतनबंदी के रूप में नहीं भुगतना पड़ेगा।
न्यायालय के आदेशों और पूर्व शासनादेशों का दिया संदर्भ
जारी पत्र में उच्च न्यायालय उत्तराखंड (नैनीताल) द्वारा जनहित याचिका संख्या 116/2018 (कुन्दन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य) में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का संदर्भ दिया गया है। न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए शासन ने इससे पहले 3 फरवरी 2026, 28 जुलाई 2026 को भी इस बाबत आदेश जारी किए थे।
पूर्व में जारी इन निर्देशों के तहत राज्य के विभिन्न विभागों में उपनल के माध्यम से तैनात पात्र कर्मचारियों तथा संबंधित मूल नियोक्ता विभागों के बीच अनुबंध निष्पादित करने या न करने वाले कर्मचारियों का पूरा ब्योरा और सूचनाएं निर्धारित प्रारूप पर शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत, पूर्व व्यवस्था रहेगी लागू
पत्र में कहा गा है कि शासनादेश के क्रम में राज्य के विभिन्न विभागों से पात्र उपनल कर्मचारियों के अनुबंध संबंधी विवरण और सूचनाएं शासन को प्राप्त हो रही हैं। इसी बीच वेतन रोकने के मामलों पर विराम लगाते हुए सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अनुबंध संपादित न करने वाले उपनल कार्मिकों को पूर्व अनुमन्य वेतन/मानदेय के भुगतान के संबंध में पूर्व निर्धारित व्यवस्था (उपनल के माध्यम से) यथावत लागू रहेगी।
इस आदेश के बाद राज्य के हजारों उपनल कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। अब विभागों द्वारा अनुबंध लंबित होने का बहाना बनाकर कर्मचारियों का वेतन या मानदेय आहरित करने से नहीं रोका जा सकेगा।
अधिकारियों को अग्रतर कार्यवाही के निर्देश
सचिव युगल किशोर पन्त ने शासन के अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, प्रभारी सचिवों, गढ़वाल व कुमाऊं के मंडलायुक्तों, सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों, कार्यालय अध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे सैनिक कल्याण विभाग के 3 फरवरी 2026 के आदेश के अनुसार मामले में तत्काल अग्रतर कार्यवाही सुनिश्चित करें। शासन के इस कड़े और स्पष्ट रुख से उपनल कर्मचारियों में खुशी की लहर है और उन्हें समय पर वेतन मिलने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.
