देहरादून के छात्र राजनीति के गलियारों में एक बार फिर तूफान खड़ा हो गया है, जहां NSUI और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की देर रात की गतिविधियों ने नगर में सनसनी फैला दी। छात्रसंघ चुनाव के ठीक पहले, जब राजनीतिक माहौल बेहद संवेदनशील था, तब भी NSUI से जुड़े छात्र नेता विनीत प्रसाद भट्ट (उर्फ बंटू) के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने और पुलिस की तत्काल कार्रवाई के विरोध में कार्यकर्ताओं ने सोमवार की रात SSP आवास की ओर कूच कर दिया। यह घटनाक्रम न केवल स्थानीय पुलिस और प्रशासन को चुनौती देने वाला रहा, बल्कि यह आशंका भी जताई गई कि चुनाव के संवेदनशील समय में की गई यह कानूनी कार्रवाई राजनीतिक प्रभावों से प्रेरित है, जिससे नगर में तनाव का माहौल गहरा गया।
पुलिस विभाग के अनुसार, विनीत भट्ट के खिलाफ रायपुर थाने में दर्ज पुराने मामलों के आधार पर अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे, जिनके आधार पर पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया अमल में लाने का प्रयास किया। हालाँकि, NSUI और कांग्रेस के नेताओं ने इस कार्रवाई को ‘चुनावी माहौल को प्रभावित करने’ की साजिश के रूप में प्रस्तुत किया। प्रदर्शनकारियों का दमदार बहाना यह था कि छात्रसंघ चुनाव के नजदीक आते ही NSUI के प्रमुख छात्र नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी या वारंट की कार्रवाई एक रणनीतिक कदम है, जिसका उद्देश्य विपक्षी छात्र संगठनों की भूमिका को कमजोर करना और चुनावी ताना-बाना में दखल देना है। वहीं, पुलिस ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूर्णतः कानूनी है और किसी भी राजनीतिक दबाव या दखल के बिना, केवल अदालत के आदेशों के अनुपालन के तहत की जा रही है।
देर रात की इस घटना के दौरान स्थिति कुछ देर के लिए आतंकजनक हो गई, जब बड़ी संख्या में जुटे NSUI और कांग्रेस कार्यकर्ता SSP आवास की ओर बढ़े। पुलिस ने दिलाराम चौक के पास प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक, धक्का-मुक्की और जमकर नारेबाजी की स्थिति उत्पन्न हुई। कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की, जबकि पुलिस ने उन्हें समझाने और शांति बरतने का प्रयास किया। तनाव को और गहराई देने के बाद, पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कुछ कांग्रेस नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें मौके से हटाया, ताकि स्थिति पर नियंत्रण बनाया जा सके।
यह घटना देहरादून की छात्र राजनीति के संवेदनशील दायरे में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई है। चूंकि छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया पहले से ही राजनीतिक गतिविधियों के साथ चरम पर थी, इसलिए चुनाव के ठीक एक दिन पहले हुई यह घटना छात्र संगठनों के बीच अंदरूनी हलचल और केकके को बढ़ावा देती है। NSUI और कांग्रेस के बीच बढ़ते तनाव ने न केवल स्थानीय पुलिस को कठिन चुनौती दी है, बल्कि यह भी यह प्रश्न उठाता है कि क्या कानूनी प्रक्रियाएं राजनीतिक हितों के अधीन आ रही हैं। आने वाले समय में, इस प्रदर्शन के परिणाम और पुलिस की आगे की कार्रवाई देहरादून की छात्र राजनीति के दृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिस पर सभी पक्षों की निगाहें टिकी हैं।
