डॉ अनिल जोशी की FIR पर बवाल!, सोशल एक्शन कमेटी ने लिखी चिट्ठी बताया गैरकानूनी – Ankita Bhandari Case

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Ankita Bhandari Case: अंकिता हत्याकांड मामले में एक के बाद एक नई एंट्री सबको चौंका रही है। पहले उर्मिला सनावर ने कथित वीआईपी के नाम का खुलासा कर सबको हैरान किया। उसके बाद स्वामी दर्शन भारती की एंट्री ने सबको को चौंका दिया था।

अब पर्यावरण विद अनिश जोशी (Padma shri anil joshi FIR) ने अज्ञात वीआईपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज एक सवाल सबके जहन में खड़ा कर दिया है। इसको लेकर पूरे प्रदेश में बवाल मचा हुआ है। सोशल एक्शन कमेटी ने इस चिट्ठी को गैरकानूनी बताया है।

पद्मश्री अनिल जोशी ने अज्ञात VIP के खिलाफ किया मुकदमा दर्ज

दरअसल पद्मश्री अनिल जोशी की शिकायत पर अज्ञात VIP के खिलाफ मुकदमा दर्ज होता है। जिसके बाद अंकिता हत्याकांड मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया। बताते चलें कि पिछले तीन सालों में अनिल जोशी ने आज तक अंकिता मर्डर केस पर कोई बयान नहीं दिया था। फिर अनिल जोशी की एंट्री और सीबीआई की संस्तुती के तुरंत बाद ही ये मुकदमा दर्ज हुआ।

मुकदमे में अब अंकिता के परिजन का लेटर भी किया शामिल

जैसा कि आपको पता ही होगा कि सीएम धामी ने सीबीआई जांच अंकिता के माता पिता के कहने पर कराई है। मुकदमे के लिए तहरीर पद्मश्री अनिल जोशी से ली गई। हालांकि पुलिस ने अपनी गलती या चूक को सुधारते हुए देर शाम अंकिता के माता पिता के उस पत्र को इस मुकदमें की विवेचना में शामिल किया।

जो अंकिता के परिजनों ने सीएम धामी से मुलाकात के दौरान सीबीआई जांच की मांग को लेकर दिया था। देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने कहा है की उस पत्र को अनिल जोशी द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमें की विवेचना में शामिल करते हुए आगे सीबीआई जांच में भी आधार बनाया जाएगा।

FIR ही बनी सीबीआई जांच की संस्तुति का आधार

इस पूरे मामले में ये एफआईआर ही सीबीआई जांच की संस्तुति करने का आधार बनी है। इसी के आधार पर सीबीआई जांच की संस्तुति कराने की कवायद चल रही है। लेकिन इस एफआईआर पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अजय नारायण शर्मा ने भी इस मुकमदमें और अनिल जोशी की एंट्री पर आपत्ति जताते हुए मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।

डॉक्टर अनिल जोशी की FIR पर बवाल!

उधर इस मामले में एक भ्रम की स्थिति ये बनी हुई है की ये एफआईआर अंकिता के परिजनों की तरफ से नहीं हुई है। अगर अंकिता के माता पिता की तहरीर पर एफआईआर होती तो शायद ये केस उनके हाथ में रहता।  लेकिन मुकदमा अनिल जोशी की तरफ से दर्ज कराया गया है। जो ना तो अंकिता भंडारी के परिजन है और ना ही किसी रिश्ते में आते है।

डॉक्टर अनिल जोशी की FIR को सोशल एक्शन कमेटी ने बताया गैरकानूनी

ऐसे में एक सवाल ये भी उठ रहा है कि अगर सीबीआई जांच से अनिल जोशी संतुष्ट हो जाते है। तो इस मुकदमे को वापस लेने के लिए राजी हो जाते है। तो क्या अंकिता के माता पिता के पत्र को आधार मानते हुए सीबीआई जांच को आगे बढ़ाया जाएगा या फिर ये जांच उसी वक्त रोक दी जाएगी। हालांकि अब डॉक्टर अनिल जोशी की FIR पर सोशल एक्शन कमेटी ने चिट्ठी लिखकर इसे गैरकानूनी बताया है।

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