उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में एक गंभीर धार्मिक और सामाजिक विवाद का मामला सामने आया है, जिसमें एक स्थानीय युवक पर छत्तीसगढ़ की एक युवती को अपने साथ ले आने, उसके धर्म परिवर्तन कराने और निकाह अंजाम दिलाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले की जानकारी युवक की पहली पत्नी को हुई, जिसने तुरंत इसका विरोध किया और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। यह घटना स्थानीय समुदाय में आतंक की लहरें खोल रही है, जहाँ हिंदू संगठनों ने भी इस मामले को लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है।
मामले की जांच के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपी युवक ने वर्ष 2025 में रोजगार के सिलसिले में गन्ने की चरखी पर काम करने के लिए छत्तीसगढ़ का सफर किया था। वहां उसकी एक महिला से पहचान हुई, जो धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई। आरोपों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में युवक ने उस महिला को अपने साथ लक्सर स्थित अपने घर पर लाया। स्थानीय सूत्रों और शिकायतों में दावा किया गया है कि लक्सर पहुंचने के तुरंत बाद युवक ने महिला को कलियर ले जाया, जहां एक मौलवी की मौजूदगी में उसके धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके तुरंत बाद दोनों का निकाह अंजाम दिया गया, साथ ही महिला का नाम भी बदल दिया गया, जो धार्मिक परिवर्तन का प्रतीक है।
यह प्रक्रिया तब जाहिर हुई जब युवक की पहली पत्नी को इन घटनाओं की जानकारी मिली। पहली पत्नी ने तत्काल इस दुविधापूर्ण स्थिति का विरोध किया, हालांकि आरोप है कि पति ने उसकी बात नहीं सुनी और दोनों नए साथ रहने लगे। इस अन्याह के बाद, पीड़ित पहली पत्नी ने लक्सर कोतवाली में शिकायत दर्ज करवाई और आरोपी युवक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों को भी तार-तार कर दिया है, जहाँ विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने लक्सर कोतवाली में जमा होकर पुलिस को तहरीर सौंपी। उन्होंने आरोपित युवक और मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर सख्त रुख अपनाया।
लक्सर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक प्रवीण सिंह कोश्यारी ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। प्रवीण सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिस टीम पूरे मामले की जांच कायम है और शिकायत में उठाए गए सभी आरोपों की गहनता से पड़ताल की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक भेदभाव या बलवती धर्म परिवर्तन जैसे मामलों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है और यदि कोई गैरकानूनी गतिविधि सामने आती है, तो उस पर कानूनन कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब न सिर्फ एक व्यक्तिगत विवाद, बल्कि धार्मिक सहिष्णुता और कानून के शासन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण परीक्षण के रूप में देखने की शुरुआत हो चुकी है।
