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अंकिता भंडारी के हत्या‑मामले में फिर से उठी राजनीतिक गूँज: सीएम धामी ने कांग्रेस पर निशाना साधा, विपक्ष ने सवालों की बौछार

उत्तराखंड के गहन राजनीतिक परिदृश्य में, अंकिता भंडारी के हत्या‑मामले ने फिर से गर्म हवा बना ली है। सिक्किम के राज्यपाल नियुक्त दुष्यंत कुमार गौतम पर विपक्ष और अंकिता के परिवार ने सवाल उठाए, जिससे यह मामला फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया। इस बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा, इसलिए वह अंकिता के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है। धामी ने कहा, “अंकिता भंडारी मामले में ठोस कानूनी कार्रवाई करने का काम हमारी सरकार ने किया है” और कांग्रेस की निंदा करते हुए कहा कि वह अपनी राजनीति को इस केस से जोड़ रही है।

बिहार के भाजपा विधायक विनोद चमोली ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंकिता “केवल एक परिवार की बेटी नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की बेटी” है। उन्होंने कहा कि माता‑पिता की पीड़ा जायज है और सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि CBI जांच जारी है और हमें परिणामों का इंतज़ार करना चाहिए। चमोली ने आरोपियों को आजीवन कारावास दिलाने में सरकार की भूमिका को रेखांकित किया और कांग्रेस पर भावनाओं का राजनीतिकरण न करने का आग्रह किया।

प्रांत अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तीखे शब्दों में कांग्रेस पर महिला अपराधों के नाम पर पाखंडी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल और प्रियंका गांधी को “देवभूमि की बेटी की मौत पर राजनीतिक रोटियाँ सेकते हुए” और साथ ही एक प्रोफ़ेसर सांसद को “सुरक्षा” देने के लिए दोषी ठहराया।

विपक्ष के नेता यशपाल आर्य ने धामी सरकार पर तीखा हमला किया, यह कहते हुए कि चार साल से अंकिता के माता‑पिता न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं पर अभी भी संतोषजनक परिणाम नहीं मिला है। उन्होंने ‘VIP’ के नाम से जुड़ी जांच की आलोचना करते हुए दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठाए और राहुल गांधी की परिवार के साथ मुलाकात का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस पीड़ित परिवार के साथ “चट्टान की तरह खड़ी” है।

अंकिता के माता‑पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने की शुरुआत की, मांग की कि दुष्यंत गौतम की नियुक्ति तब तक रोकी जाए जब तक CBI जांच पूरी नहीं होती। राहुल और प्रियंका गांधी भी समर्थन में आए। दिल्ली पुलिस ने तड़के ही धरने को खत्म करके माता‑पिता को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। इसके बाद परिवार ने केंद्र सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया, अन्यथा भूख हड़ताल की चेतावनी दी।

इस प्रकार, अंकिता भंडारी के हत्या‑मामले ने फिर से राजनीतिक परिदृश्य को जकड़ लिया है, जहां विभिन्न दलों ने अपनी-अपनी पॉलिटिकल लाइनें प्रस्तुत की हैं और न्याय के लिए संघर्ष जारी है।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।