📅 Thursday, 08 October 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
होम » खबरनामा » योगनगरी का राजनीतिक संकट: 2027 में ऋषिकेश सीट पर भाजपा के 20 साल के शासन को मिलागा जाम?

योगनगरी का राजनीतिक संकट: 2027 में ऋषिकेश सीट पर भाजपा के 20 साल के शासन को मिलागा जाम?

उत्तराखंड की राजनीतिक नक़्शे में ऋषिकेश विधानसभा सीट का स्थान केवल एक चुनावी हलके से आगे बढ़कर पूरे प्रदेश के सियासी मिजाज का ‘थर्मामीटर’ बन चुकी है। गढ़वाल का प्रवेश द्वार और विश्वविख्यात ‘योग नगरी’ होने के नाते, इस सीट पर होने वाली हर राजनीतिक हलचल की गूंज पूरे उत्तराखंड में सुनाई देती है। 2027 के विधानसभा चुनावों की मिसाल अभी दूर है, लेकिन ऋषिकेश के चौक-चौराहों, चाय की दुकानों और गंगा घाटों पर राजनीतिक गोटियों की बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। इस बार की जंग का सार इसके इतिहास में छिपा है; 2022 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत-हार का अंतर 19,057 वोट था। हालांकि, प्री-एसआईआर (31,089 वोट) और एसआईआर (27,120 वोट) में कुल 58,209 वोटों का कटा हुआ खंड इस अंतर से तीन गुना अधिक है। यह विशाल वोटों का संकट यह प्रश्न खड़ा करता है कि क्या भाजपा अपने इस गढ़ को बचा पाएगी, या फिर सत्ता विरोधी लहर और अंदरूनी खींचतान का फायदा उठाकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दल नया सियासी समीकरण गढ़ेंगे।

ऋषिकेश की राजनीति पिछले दो दशकों से भाजपा के एकछत्र शासन का गवाह रही है। 2002 के पहले चुनाव में कांग्रेस के शूरवीर सिंह सजवाण के जीत के बाद, 2007 में भाजपा के प्रेमचंद अग्रवाल ने जो जीत दर्ज की, उसके बाद यह सीट भगवा पार्टी का अभेद्य दुर्ग बन गई। प्रेमचंद अग्रवाल ने 2007, 2012, 2017 और 2022 में लगातार चार बार जीत की हैट्रिक को तोड़ते हुए अपना दबदबा कायम रखा। 2012 में उनका कांग्रेस के राजपाल खरोला से कांटे का मुकाबला था, जबकि 2017 की प्रचंड मोदी लहर में भी उन्होंने राजपाल खरोला और निर्दलीय संदीप गुप्ता की तगड़ी घेराबंदी के बावजूद अपनी सीट बरकरार रखी। 2022 में भी विधानसभा भर्ती विवाद और स्थानीय विरोध के दावों के बावजूद, प्रेमचंद अग्रवाल ने कांग्रेस प्रत्याशी जयेंद्र चंद रमोला को 19,057 वोटों के भारी-भरकम अंतर से हराकर अपनी सियासी बादशाहत को नई मजबूती प्रदान की।

हालांकि, 2027 की राजनीतिक मुहिम में परिस्थितियां काफी बदलती नजर आ रही हैं। ऋषिकेश का जनसांख्यिकीय ढांचा शहरी और ग्रामीण मतदाताओं के दो अलग-अलग ध्रुवों पर टिका है। नगर निगम क्षेत्र, आवास विकास और गंगा तटीय इलाकों में व्यापारी, ब्राह्मण और वैश्य समाज की बहुलता है, जिसे भाजपा का ‘कैडर वोट’ माना जाता है और जो पार्टी की जीत का मुख्य आधार रहा है। इसके विपरीत, रायवाला, छिद्दरवाला और वीरभद्र जैसी ग्रामीण न्याय पंचायतों में ठाकुर-राजपूत और किसान मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन इलाकों में कृषि भूमि के अधिकार, जलभराव और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस सेंधमारी की कोशिशें करती है। साथ ही, ओबीसी, पंजाबी और पूर्वांचली समुदाय के मतदाता भी हार-जीत के अंतर को तय करने वाले ‘स्विंग वोटर’ के रूप में उभर रहे हैं।

2027 के महासंग्राम में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के अंदरूनी टिकट की होड़ है। कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, जो अपने अनुभव और मजबूत नेटवर्क के बल पर स्वाभाविक दावेदार हैं, उनके लिए 20 साल का लंबा कार्यकाल और बीते दिनों के कुछ विवाद बड़ी बाधा बन सकते हैं। टिकट की दौड़ में सुबोध उनियाल, कुसुम कंडवाल, अनीता ममगांई, रविंद्र सिंह राणा, प्रतीक कालिया, गिरीश डोभाल और संदीप गुप्ता जैसी बड़ी शख्सियतों के नाम सामने आ रहे हैं। हालांकि, संदीप गुप्ता के कुछ बयान उन्हें घेर सकते हैं, और भाजपा आलाकमान ‘नो-रिपीट’ या चेहरा बदलने के फॉर्मूले को अपना सकता है, जिससे टिकट की लॉटरी खुल सकती है।

इसके विपरीत, कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी फांस उसकी अंदरूनी गुटबाजी है। 2022 के प्रत्याशी जयेंद्र चंद रमोला युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, जबकि दो बार चुनाव लड़ चुके राजपाल सिंह खरोला का अपना पुराना कैडर आधार है। संजय गुप्ता समेत अन्य स्थानीय नेता भी दावेदारी में पीछे नहीं हैं। कांग्रेस के लिए जीत की कुंजी एक सर्वसम्मत चेहरे को चुनने में है। इसके अलावा, निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों का प्रभाव भी नगण्य नहीं है। 2022 में उत्तराखंड जनएकता पार्टी के कनक धनै ने 13,000 से अधिक वोट हासिल कर अपने महत्व को साबित किया था। भले ही कनक धनै अब भाजपा में हैं, लेकिन 2027 में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) या कोई मजबूत निर्दलीय चेहरा दोनों दिग्गजों के समीकरणों में उलटफेर कर सकता है। अंततः, 2027 में ऋषिकेश की जंग केवल दो पार्टियों के बीच नहीं होगी, बल्कि यह एक ऐसी त्रासदी होगी जहां भाजपा को अपने शहरी वोट बैंक को एकजुट रखना होगा और कांग्रेस को गुटबाजी से ऊपर उठकर एक भरोसेमंद विकल्प पेश करना होगा।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।