अगर आपका नाम मतदाता सूची से कट गया है, तो हड़बड़ी में बिना सोचे‑समझे फॉर्म‑6 भरने की गलती बिल्कुल न करें। एक छोटी सी लापरवाही आपको भारी कानूनी मुसीबत में डाल सकती है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) के तहत चुनाव आयोग को दी जाने वाली घोषणा में कोई भी गलत या झूठी जानकारी देना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है।
उत्तराखंड में प्री‑एसआईआर (Pre‑SIR) और विशेष गहन पुनर्रीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में बड़ा फेरबदल हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में कुल 13.95 लाख वोटरों के नाम सूची से काटे गए हैं, जबकि 1.29 लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं। एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 3 अक्टूबर तक उत्तराखंड में कुल मतदाताओं की संख्या 71,58,949 दर्ज की गई है।
कई बार देखा जाता है कि वोटर लिस्ट से नाम कटते ही लोग तुरंत नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए फॉर्म‑6 भर देते हैं। नियम यह कहता है कि यदि आप पहले से कहीं पंजीकृत थे और यह जानते हुए भी झूठा हलफनामा (Affidavit) जमा करते हैं कि आपका नाम कभी किसी लिस्ट में था ही नहीं, तो आप पर कानूनी शिकंजा कस सकता है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत झूठी घोषणा करने पर 1 साल तक की जेल, जुर्माना या फिर दोनों एक साथ भुगतने पड़ सकते हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य फर्जी या दोहरे वोटरों (Dual/Fake Voters) की धांधली को रोकना है।
यदि आप अपने नाम को फिर से सूची में लाना चाहते हैं, तो सही तरीका अपनाएँ:
1. पुरानी जानकारी न छिपाएँ: दोबारा आवेदन करते समय अपनी पुरानी वोटर आईडी या EPIC नंबर की जानकारी कभी न छिपाएं।
2. बीएलओ (BLO) से संपर्क करें: सबसे पहले अपने इलाके के बूथ‑लेवल अधिकारी (BLO) या निर्वाचन कार्यालय जाएं। अपने पुराने EPIC कार्ड का हवाला देकर वहां फॉर्म‑8 या पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्ति दर्ज कराएं।
3. पोर्टल की मदद लें: चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल (ECI Portal) या ‘Voter Helpline App’ पर जाकर अपने मामले के सही तथ्य दर्ज कर सकते हैं।
4. ईआरओ (ERO) से सलाह लें: अगर आपको कोई भ्रम है, तो अपने क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) से सलाह लेकर ही आवेदन जमा करें ताकि आप पर झूठा हलफनामा देने का कोई आरोप न लगे।
यह जानकारी “क़ब़ार उत्तराखंड – उत्तराखंड समाचार” से ली गई है।
