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कनिष्ठ विधायक उमेश कुमार के खानपुर विधानसभा सीट से इस्तीफे की घोषणा के बाद उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मच गई है। इस घटना पर पूर्व प्रत्याशी और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र सिंह पनियाला ने एक तीखा वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने उमेश कुमार के इस्तीफे को “सस्पेंड होने से बचने का राजनीतिक ड्रामा” कहा। पनियाला के अनुसार, उमेश ने मई 2022 में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत पार्टी बदलने के कानून के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष ठोस सबूतों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। वह दावा करते हैं कि उमेश कुमार ने एक निर्दलीय विधायक के रूप में चुनाव जीतने के बाद अपनी अलग पार्टी बनाई और राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने, जिससे विधायकी समाप्त होने का स्पष्ट आधार बनता है। पनियाला ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के “रहमो-करम” पर निर्भर रहते हुए उमेश ने चार साल तक विधायक पद संभाला, पर अब शिकायत के सत्यापन के बाद सस्पेंड होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया।
पुनः, पनियाला ने उमेश के किसानों और जनता के मुद्दों पर कार्यों पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि उमेश ने 120 करोड़ रुपये के बकाया और 2023 के बाढ़ मुआवजे के दावे पर जोर दिया, जबकि पिछले पाँच वर्षों में इन मुद्दों पर कोई ठोस आंदोलन नहीं हुआ। पनियाला ने 2010 की लक्सर क्षेत्र में आई भयंकर बाढ़ के दौरान, जब वे जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन थे, 13.82 करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में पहुँचाने की पहल की थी, और इसके विपरीत, बिजली बिलों में घोटाले के आरोप भी लगाते हैं। पनियाला का तर्क है कि 3.5 किलोवाट के घरेलू कनेक्शन पर “सिक्योरिटी” के नाम पर 20–25 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं, पर उमेश ने इस पर चुप्पी साध रखी है।
“अगर उमेश में थोड़ी भी नैतिकता होती, तो 2022 में ही इस्तीफा दे देते, ताकि जनता के सामने स्पष्टता आती,” पनियाला ने वीडियो में कहा। उन्होंने उमेश को “कायर” कहा और चेतावनी दी कि अब केवल दो महीने बचे हैं, इसलिए भागने के बजाय कार्यकाल पूरा करना चाहिए। पनियाला ने खानपुर की जनता से आग्रह किया कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे ड्रामों से सतर्क रहें और सही प्रतिनिधि चुनें। इस बीच, उमेश कुमार का इस्तीफा उत्तराखंड की राजनीतिक धारा में एक नया मोड़ लेकर आया है, जहाँ 2026 में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार को गिराने में उनकी भूमिका पहले ही स्पष्ट हो चुकी है।
