📅 Thursday, 08 October 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
होम » खबरनामा » उत्तराखंड की राजनीतिक पटरी पर नया मोड़: दिनेश आर्य ने राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किया नामांकन, धामी-भट्ट समेत दिग्गजों ने दिया सहयोग

उत्तराखंड की राजनीतिक पटरी पर नया मोड़: दिनेश आर्य ने राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किया नामांकन, धामी-भट्ट समेत दिग्गजों ने दिया सहयोग

उत्तराखंड की राजनीतिक हलचल में एक बड़ा बदलाव आते हुए दिखता है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दिनेश आर्य ने मंगलवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र जमा कर दिया। देहरादून स्थित विधानसभा परिसर में यह प्रक्रिया पूरी करते हुए आर्य ने आने वाले छह सालों के लिए उच्च सदन में अपनी एंट्री के लिए पहला कदम उठाया। इस महत्वपूर्ण क्षण में उनके साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत पार्टी के अनेक दिग्गज विधायक और नेता उपस्थित थे, जो इससे साबित होता है कि पार्टी शीर्ष स्तर पर इस उम्मीदवार का समर्थन कर रही है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले भाजपा विधायक दल की एक विशेष बैठक भी आयोजित की गई, जिसके बाद आर्य पार्टी के अन्य प्रतिनिधियों के साथ मिलकर विधानसभा पहुंचे और अपना पर्चा दाखिल किया।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस मौके पर विश्वास जताया है कि दिनेश आर्य निर्विरोध निर्वाचित होंगे और पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच उनकी उम्मीदवारी ने उत्साह का माहौल बना दिया है। भट्ट के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न वर्गों में आर्य के नाम से जो जुड़ाव है, वह उन्हें मजबूत आधार प्रदान करता है। चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर निर्धारित की गई है, जबकि 7 अक्टूबर को इन नामांकन पत्रों की जांच-पड़ताल होगी। उम्मीदवारों को 9 अक्टूबर तक अपना नाम वापस लेने की सहूलियत दी गई है। यदि कोई नामांकन वापस लिया नहीं जाता है, तो 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच मतदान प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिसके तुरंत बाद रात 5 बजे से मतगणना प्रारंभ हो जाएगी।

यह शासी सीट खाली इस कारण हो रही है कि मौजूदा राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। भारतीय संविधान के तहत, राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता है, हालांकि इसका कार्यकाल छह वर्षों का होता है। इस संस्थागत संरचना के अंतर्गत, हर दो साल में सदन के करीब एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव किया जाता है, जिससे सदन का निरंतरता और अनुभव का संतुलन बना रहता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से उत्तराखंड की राजनीतिक पटरी पर एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है, जहां दिनेश आर्य के नेतृत्व में राज्य के हितों को केंद्र सरकार के सामने रूबाना किया जा सकेगा।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।