यूपीएसएसएससी के 2016 वीपीडीओ घोटाले में नई दलीलें, राजनीति में फिर से गर्मा उठी बहस

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा 6 मार्च 2016 को आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में धांधली के आरोपों ने फिर से प्रदेश की राजनीति को हिला दिया है। परीक्षा के परिणाम मार्च के अंत‑अप्रैल में घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आयोग के कार्यालय का घेराव किया, राजभवन में कूच कर तत्कालीन राज्यपाल से परीक्षा रद्द करने की मांग की। इस पर राज्यपाल ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी के नेतृत्व में एक सदस्यीय जांच समिति गठित की, परन्तु 10‑15 दिनों में ही समिति ने रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी न होने का दावा किया, जिससे आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष ने प्रमाण‑पत्रों का त्वरित सत्यापन शुरू कर दिया।

हरिश रावत के पुनः पदभार ग्रहण करने के बाद सरकार ने 20 मई 2016 को तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति बनायी। इस समिति के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह थे, जबकि वरिष्ठ IPS अधिकारी एवं UKSSSC के वर्तमान अध्यक्ष गणेश सिंह मार्टोलिया और अपर सचिव न्याय महेश चंद्र कौशिबा सदस्य बने। समिति के गठन के साथ ही नियुक्तियों पर रोक लगाई गई। पूर्व सदस्य दीवान सिंह भैसोड़ा ने बताया कि उन्होंने और आयोग के सदस्य महेश चंद्रा ने पंजीकृत डाक के माध्यम से समिति को अपने पक्ष में दस्तावेज़ भेजने का अनुरोध किया, पर उन्हें कभी सुनवाई नहीं मिली। अंततः समिति ने ओएमआर शीट में बड़े पैमाने पर ‘ओवरराइटिंग’ की पुष्टि की और 2016 की परीक्षा को रद्द कर दिया।

पुनः परीक्षा 25 फ़रवरी 2018 को आयोजित हुई, जिसमें केवल 2016 के अभ्यर्थियों को ही बैठने की अनुमति थी। आश्चर्यजनक रूप से, 2016 में 85‑96 % अंक प्राप्त कर शीर्ष 181 में आए 167 उम्मीदवार 2018 में पूरी तरह असफल रहे, जबकि केवल 13‑14 आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ही पास हो सके। इस परिणाम ने धांधली के प्रमाण को और स्पष्ट कर दिया।

विजिलेंस ने मामले की जांच संभाली, पर 3‑4 साल तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। 10 अगस्त 2020 को दीवान सिंह ने 20 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जबकि 2021 में विभिन्न UKSSSC परीक्षाओं में धांधली की FIR दर्ज होने पर जांच को STF को सौंपा गया। STF ने तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और कई दलालों को गिरफ्तार किया, पर दीवान सिंह ने कहा कि दस साल बीतने के बाद भी कई मुख्य आरोपी अभी भी आज़ाद घूम रहे हैं और मामला अदालत में निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंचा।

इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी की, पर दीवान सिंह ने सवाल उठाया कि क्या ED ने उसी तरह उन जेल‑सजा प्राप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के ठिकानों पर भी छापे मारकर अवैध संपत्तियों की सूची तैयार की है। उन्होंने सभी सीज संपत्तियों का खुलासा करने की मांग की। पूर्व विधायक मनोज रावत ने भी इस पोस्ट को साझा कर कहा कि यह पूरी घटना पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत को निशाना बनाने की राजनीतिक साजिश है। उन्होंने बताया कि 2016 में धांधली की जानकारी देने पर आर.बी.एस. रावत की साफ‑सुथरी छवि के कारण कोई भरोसा नहीं किया गया, पर बाद में 2017 के बाद भाजपा सरकार ने रिपोर्ट को नजरअंदाज़ कर रावत को एक संघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री तीर्थ सिंह रावत को OSD नियुक्त किया। दीवान सिंह और मनोज रावत के बयानों से स्पष्ट है कि VPDO‑2016 घोटाला अब भी उत्तराखंड की राजनीति में नई जंग का कारण बन सकता है।

Original Title: तो ED ने इस बार BJP को फंसाया ?, VPDO भर्ती घोटाले में UKSSSC के पूर्व सदस्य का बड़ा खुलासा

Original Content: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा वर्ष 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में गर्मा गया है। हाल ही में ED द्वारा चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को इस प्रकरण में आरोपित करने के कथित प्रयासों पर आयोग के पूर्व सदस्य दीवान सिंह भैसोड़ा ने गहरी आपत्ति जताई है। …