The post यूकॉस्ट में उद्योग, वैज्ञानिकों और शिक्षण संस्थानों ने साझा की कार्ययोजना appeared first on Avikal Uttarakhand.
उत्तराखण्ड में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और बायो मैन्युफैक्चरिंग की संभावनाओं पर मंथन

अविकल उत्तराखण्ड
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) में “उत्तराखण्ड में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3डी प्रिंटिंग) एवं बायो मैन्युफैक्चरिंग के परिनियोजन की संभावनाएं” विषय पर विचार-विमर्श बैठक आयोजित की गई।
बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, नास्कॉम, वैज्ञानिकों, उद्यमियों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने राज्य में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और बायो मैन्युफैक्चरिंग के उपयोग, अनुसंधान, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग राज्य में औद्योगिक विकास, नवाचार और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है।
उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल, स्वास्थ्य, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में इस तकनीक के उपयोग की संभावनाएं हैं। इसके लिए उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय आवश्यक है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक डॉ. शंकदीप दास ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की अवधारणा, इसके औद्योगिक उपयोग तथा केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सरकार अनुसंधान, कौशल विकास, अवसंरचना और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दे रही है।
डॉ. शिभु जॉन ने बताया कि उनकी संस्था विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के साथ मिलकर प्रशिक्षण, अनुसंधान, उत्पाद विकास और तकनीकी हस्तांतरण पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा।
एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग विशेषज्ञ डॉ. जसप्रीत ने इस तकनीक के माध्यम से स्थापित स्टार्टअप के उदाहरण साझा किए और युवाओं को इस क्षेत्र में उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डैफोडिल्स लेबोरेट्रीज के प्रबंध निदेशक एवं फार्मा एसोसिएशन उत्तराखण्ड के उपाध्यक्ष डॉ. आई.पी.एस. चावला ने कहा कि यह तकनीक दवा निर्माण, कस्टमाइज्ड मेडिसिन, प्रोटोटाइपिंग और उत्पादन प्रक्रिया में उपयोगी हो सकती है।
प्रो. अरुण गिरियापुर ने कहा कि 3डी प्रिंटिंग से उत्पाद डिजाइन, कस्टमाइज्ड निर्माण, सामग्री की बचत और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने तकनीकी सहयोग, कौशल विकास, संयुक्त अनुसंधान और स्टार्टअप संवर्धन में सहयोग का आश्वासन दिया।
डॉ. सौमित्र पाण्डेय ने कहा कि कॉस्मेटिक उद्योग में भी इस तकनीक का उपयोग उत्पाद विकास, पैकेजिंग डिजाइन और उत्पादन प्रणाली में किया जा सकता है।
बैठक में राज्य में साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, कौशल विकास, अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
अंत में यूकॉस्ट के परियोजना अधिकारी डॉ. नरेश चन्द ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
The post यूकॉस्ट में उद्योग, वैज्ञानिकों और शिक्षण संस्थानों ने साझा की कार्ययोजना appeared first on Avikal Uttarakhand.
