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देहरादून-मसूरी में MDDA सर्वे का असर: आवासीय भवनों में चालू दुकानों और होटलों पर नोटिस, कारोबारियों की आजीविका खतरे में

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और पर्यटन नगरी मसूरी में व्यापारिक माहौल पर एक नया संकट टूट पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन के तहत, आवासीय भवनों में संचालित दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों और होमस्टे (B&B) के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। देहरादून-मसूरी विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा शुरू किए गए प्रत्यक्ष सर्वे के तहत अब तक 200 से अधिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इस कड़ी कार्रवाई ने न केवल छोटे कारोबारियों को, बल्कि उनके परिवारों और कर्मचारियों की आजीविका को भी गंभीर खतरे में डाल दिया है, जिससे क्षेत्र में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर देहरादून के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में खजाना दास (राजपुर विधायक और कैबिनेट मंत्री), गणेश जोशी (मसूरी विधायक और कैबिनेट मंत्री) तथा सविता कपूर (कैंट विधायक) सहित अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए प्रभावित कारोबारियों के लिए कानूनी और व्यावहारिक राहत का मार्ग खोजना था। विधायकों ने जोर दिया कि यदि कार्रवाई का दायरा और अधिक वृद्धि पाता है, तो बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार प्रभावित होगा, विशेषकर उन छोटे व्यापारियों की जिनका पूरा परिवार इन व्यवसायों पर निर्भर है।

बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री खजाना दास ने सरकार के स्वरोजगार प्रोत्साहन के मottu को हावी करते हुए कहा कि कारोबारियों के सामने आ रही कानूनी बाधाओं को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इन समस्याओं के समाधान हेतु सक्रिय प्रयास कर रही है। वहीं, प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल ने वैश्विक मानकों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि विदेशों में भी आवासीय इकाइयों में व्यावसायिक गतिविधियां आम हैं, इसलिए प्रभावित लोगों को राहत देने के विकल्प तलाशे जाने चाहिए ताकि न्यायिक आदेश और जनजीवन में संतुलन बनी रहे।

मसूरी में इस स्थिति का प्रभाव और भी गहरा है, जहाँ आवासीय भवनों में होटल, रेस्तरां और बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) संचालक गहरी चिंता में डूबे हुए हैं। उनका निवेश और रोजगार दोनों प्रभावित होने की आशंका है। वर्तमान में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा नियमों के तहत कारोबारियों को राहत दी जा सकती है या उन्हें अपनी व्यावसायिक गतिविधियों में संरचनात्मक बदलाव करना पड़ेगा। आने वाले दिनों में सरकार के अगले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि चुनावी सत्र के पृष्ठभूमि में यह मामला सरकार और जनप्रतिनिधियों दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।