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एआई‑संचालित “वॉइस पोर्टल” से गढ़वाली‑कुमाऊँनी‑जौनसारी को मिलेगा डिजिटल पहचान

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कैम्प कार्यालय में एआई स्ट्रैटेजिक इंजीनियरिंग (AiSE) फाउंडेशन की “भाषा एआई” (Bhasha AI) पहल के तहत एक विशेष “वॉइस कलेक्शन पोर्टल” का उद्घाटन किया। इस पहल की शुरुआत धामी जी की कुमाऊँनी भाषा में रिकॉर्ड की गई भावपूर्ण वॉइस क्लिप से हुई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राज्य की अनोखी बोलियों को तकनीकी मंच पर लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इस पोर्टल के माध्यम से गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी जैसी स्थानीय भाषाओं के स्वर, शब्दावली और उच्चारण को डिजिटल रूप में संकलित किया जाएगा, जिससे भविष्य में एआई‑सहायता वाले उपकरण इन बोलियों को समझ कर संवाद कर सकेंगे।

भाषा एआई पहल का मूल उद्देश्य उत्तराखंड की विविध भाषाई धरोहर को संरक्षित करना और इसे आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना है। AiSE फाउंडेशन के संस्थापक सचिदानंद सेमवाल ने बताया कि वर्तमान में गूगल, एलेक्सा या चैटजीपीटी जैसी प्रणालियाँ मुख्यतः हिंदी‑अंग्रेजी पर केंद्रित हैं, जबकि हमारे प्रदेश की लोकभाषाएँ अक्सर अनदेखी रह जाती हैं। पोर्टल पर विभिन्न जिलों के नागरिक अपनी आवाज़ अपलोड करेंगे, जिससे एआई मॉडल को विभिन्न लहजों और उच्चारणों की सीख मिल सकेगी। इस डिजिटल भंडार से भविष्य में सरकारी योजनाओं की जानकारी भी स्थानीय बोली में उपलब्ध कराई जा सकेगी, जिससे दूरस्थ गाँवों के लोग भी सीधे अपनी भाषा में लाभ उठा सकेंगे।

कार्यक्रम के दौरान धामी जी ने कहा, “हमारी बोली‑भाषाएँ हमारी पहचान हैं; इन्हें बचाने के लिए नई तकनीक का उपयोग करना अनिवार्य है।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में शब्दों का उच्चारण स्थान‑स्थान पर बदलता है, और इस विविधता को समझना एआई के लिए चुनौतीपूर्ण है। इस कारण ही व्यापक आवाज़ संग्रह से मॉडल को स्थानीय विविधताओं को पहचानने में मदद मिलेगी, जिससे नागरिकों को सरकारी सेवाओं से जुड़ी जानकारी उनके अपने लहजे में मिल सकेगी।

उत्सव में पद्मश्री गायक प्रीतम भरतवाण, साथ ही कई सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक दिग्गजों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की। प्रीतम जी ने कहा, “हमारी लोकभाषाओं में जड़ें गहरी हैं; ‘जागर अकादमी’ इस पहल में उच्चारण की शुद्धता और मौलिकता को बनाए रखने में सहयोग देगी।” इस अवसर पर शक्ति प्रसाद भट्ट, गजेंद्र नौटियाल, अनिरुद्ध रैथवान, निधि सेमवाल, अनिल गोदियाल, डॉ. जे.के. पांडे और देव रतूड़ी सहित कई गणमान्य हस्तियों ने समर्थन व्यक्त किया। इस प्रकार, “वॉइस पोर्टल” न केवल तकनीकी नवाचार का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को डिजिटल युग में सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी बनकर उभरा है।

Original Title: अब एआई भी बोलेगा पहाड़ी बोली! सीएम धामी ने शुरू किया गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी का ‘वॉइस पोर्टल’

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।