रामनगर में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने वाली ‘तीर्थ’ योजना की विफलता: पांच साल में नहीं रखी जा सकी एक भी ईंट

रामनगर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करीब पांच साल पहले शुरू की गई लाइट एंड साउंड शो की योजना अब आगे नहीं बढ़ेगी। उत्तराखंड के पहले लाइट एंड साउंड शो के तौर पर प्रस्तावित इस योजना का उद्देश्य पर्यटकों को रोशनी, ध्वनि और दृश्यों के जरिए रामनगर और कॉर्बेट क्षेत्र की कहानी से रूबरू कराना था। योजना की घोषणा 21 मार्च 2021 को तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने रामनगर में की थी। उस समय इस परियोजना पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था।

योजना को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निर्देशन में तैयार किया जाना था, लेकिन जमीन को लेकर योजना अटक गई। जिस जमीन का चयन किया गया था वह रामनगर वन प्रभाग की थी, जबकि योजना कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निर्देशन में बनाई जानी थी। इसके बाद यह सवाल उठा कि कॉर्बेट की योजना रामनगर वन प्रभाग की जमीन पर कैसे तैयार की जाएगी। जिम्मेदारी बदलने में करीब एक साल निकल गया और योजना आगे बढ़ने के बजाय विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी बदलती रही।

रामनगर वन प्रभाग ने इस योजना को तराई पश्चिमी वन प्रभाग के जिम्मे कर दिया, लेकिन तराई पश्चिमी वन प्रभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन की थी। काफी कोशिशों के बावजूद अधिकारियों को इसके लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल सका। जब दूसरी जगह जमीन नहीं मिल पाई तो तराई पश्चिमी वन प्रभाग की ओर से अपनी कार्यशाला की जमीन पर लाइट एंड साउंड शो बनाने का प्रस्ताव सामने आया। इस तरह योजना अपने शुरुआती स्थान से आगे बढ़ने के बजाय अलग-अलग विभागों और जमीन के विकल्पों के बीच उलझती चली गई।

पांच साल में नहीं रखी जा सकी एक भी ईंट और योजना को बंद कर दिया गया। रामनगर विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने कहा कि यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की घोषणा थी, लेकिन अब इसे नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कॉर्बेट के साइलेंस जोन को वजह बताते हुए लाइट एंड साउंड शो के निर्माण से मना कर दिया गया है। ऐसे में रामनगर में प्रस्तावित उत्तराखंड का पहला लाइट एंड साउंड शो अब नहीं बन पाएगा। पांच साल पहले देखे गए इस पर्यटन प्रोजेक्ट का सपना जमीन पर आकार लेने से पहले ही खत्म हो गया।