हरिद्वार की राजनीतिक चर्चाओं में इन दिनों जोरदार हलचल मची हुई है, जहां एक ओर कांग्रेस नेता अशोक शर्मा स्थानीय प्रशासन और सरकार के खिलाफ मुखरता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अचानक वित्तीय क्षेत्र में उठे एक नए विवाद ने उन्हें केंद्र में खड़ा कर दिया है। मंगलवार को जीएसटी (GST) विभाग की विशेष टीम ने पूर्व मेयर अनीता शर्मा के पति और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक शर्मा के होटल ‘अशोका’ पर गहन तलाशी और छापा डाला। यह कार्रवाई होटल के निर्माण और संचालन से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दावों की सटीकता और कानूनी वैधता की जांच के उद्देश्य से की गई थी। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस ऑडिट के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं का पता चला है, जिससे होटल प्रबंधन और कर अधिकारियों के बीच तनातनी की स्थिति बन गई है।
जीएसटी विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, होटल ने लगभग 20 लाख रुपये के इंट्रा-स्टेट टैक्स क्रेडिट का दावा किया था, जिसे विभाग ने कानूनी दायरों के बाहर और ‘पात्र’ नहीं माना। इस राशि को अवैध या गलत तरीके से वापसी के लिए दावा किया गया था। जांच के दौरान जीएसटी टीम ने होटल के कार्यालय और बिलिंग सेक्शन से करीब दो पेटी (2 boxes) महत्वपूर्ण दस्तावेज, बिल और लेजर बुक्स जब्त किए हैं, जिनमें होटल के वित्तीय लेन-देन का पूरा इतिहास दर्ज है। सहायक आयुक्त (राज्य कर) राजीव तिवारी ने संवाददाताओं को दिए गए बयान में स्पष्ट किया कि जब्त किए गए इन दस्तावेजों की विस्तृत और तकनीकी जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि होटल मालिक अशोक शर्मा ने जांच के दौरान ही 20 लाख रुपये की राशि को लेकर विभाग के पास जमा कर दिया है, हालांकि अंतिम कार्रवाई दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद ही तय की जाएगी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि अशोक शर्मा पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार के स्थानीय मुद्दों को लेकर सत्ताधारी दल और प्रशासन पर लगातार निशाना साध रहे हैं। उन्होंने सड़कों की खराब स्थिति, सीवर लाइनों की गतिशीलता, सार्वजनिक सुविधाओं के अभाव और विशेष रूप से शौचालयों की स्वच्छता को लेकर प्रशासन की लापरवाही का आरोप लगाया है। हाल ही में, शर्मा ने हरिद्वार के एक सार्वजनिक टॉयलेट में कथित तौर पर मूत्रालय के उपयोग के बदले 10 रुपये वसूली की जाने वाले मामले को उठाया था, जिसे उन्होंने सरकारी नीतियों की विफलता का प्रमाण बताया था। इस पृष्ठभूमि में जीएसटी विभाग का यह कदम राजनीतिक तौर पर भी सख्त नजर आ रहा है, जिससे स्थानीय विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को राजनीतिक विरोध की शिकंजा कसने की कोशिश बताने का संकेत देते हुए हंगामा किया है। अब आगे देखने वाली बात यह होगी कि जब्त दस्तावेजों की जांच में क्या सामने आता है और जीएसटी विभाग अशोक शर्मा के विरुद्ध आगे कोई बड़ी कार्रवाई करता है या नहीं।
