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चुनाव आयोग के “जादुई” सॉफ्टवेयर से वोटर लिस्ट में अनचाही बदलाव: उत्तराखंड‑उत्तर प्रदेश में अजीबोगरीब मामले

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देश के दो प्रमुख राज्यों—उत्तarakhand और उत्तर प्रदेश—में चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम से जुड़े अजीब घटनाओं ने नागरिकों और राजनीतिक दलों में गहरी चिंता उत्पन्न कर दी है। CPI‑ML के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी को हाल ही में एक एसएमएस मिला, जिसमें बताया गया कि उनकी वोटर आईडी में सुधार हेतु दी गई आवेदन स्वीकृत हो गई है, जबकि उन्होंने कभी कोई अर्जी नहीं दी थी। मैखुरी ने इस अनपेक्षित संदेश को “ऑटोजेनरेटेड फॉर्म‑7” की तरह वर्णित किया और सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग का सॉफ्टवेयर खुद‑ब‑खुद फॉर्म‑8 बना कर जमा कर रहा है। यह संदेश तब आया, जब उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया के बाद SSR (स्पेशल समरी रिवीजन) शुरू होने वाली थी, पर आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही आम लोगों के मोबाइल पर ऐसे “रहस्यमयी” नोटिफिकेशन पहुँचने लगे।

उत्तarakhand में इस समस्या के कई उदाहरण सामने आए हैं—जैसे किसी मतदाता का नाम, पिता का नाम और घर का नंबर सभी “पिथौरागढ़ पिथौरागढ़” और “इंडियन‑इंडियन” जैसी असंगत प्रविष्टियों में बदल दिया गया। उत्तर प्रदेश में तो स्थिति और अधिक चौंकाने वाली बनी है। कई वोटर की सूची में बिना किसी आवेदन के नाम, पता और रिश्ते बदल कर “मृत” घोषित कर दिया गया, जबकि कुछ के पिता के नाम के स्थान पर उनकी शैक्षणिक डिग्री “B.Com” लिखी गई। सबसे उल्लेखनीय त्रुटि में रामहित यादव का नाम “राम ने यादव को मारा” में बदल गया, क्योंकि स्पेस की गलती से “Ram hit Yadav” को सॉफ़्टवेयर ने “Ram hit” को “मारा” के रूप में अनुवादित किया। इसी तरह, मोहम्मद इकबाल का नाम “मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं” और हेमा वर्मा की जन्मतिथि 1891 लिखी गई, जिससे वह 137‑साल की सबसे बुजुर्ग महिला बन गई।

इन घटनाओं के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने कहा कि यह गड़बड़ी पहली बार लागू हुए ऑनलाइन सॉफ़्टवेयर और शब्दों के लिटरल ट्रांसलेशन की वजह से हुई है, और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, CPI‑ML ने इस “ऑटो‑जेनरेटेड फॉर्म‑8” के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताते हुए तत्काल निष्पक्ष जांच की माँग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस “जादुई” सॉफ़्टवेयर ने नागरिकों की सहमति के बिना उनके वोटर विवरणों में बदलाव किया।

नागरिकों को सलाह दी गई है कि यदि उन्हें चुनाव आयोग से ऐसा कोई संदेश मिले जिसमें उन्होंने कभी आवेदन नहीं किया हो, तो तुरंत अपने ब्लॉ‑ऑफ़िस (BLO) या तहसील कार्यालय से संपर्क करें। नहीं तो चुनाव के दिन जब वे मतदान के लिए बूथ पर पहुंचेंगे, तो अपनी ही नाम की पर्ची न मिलने की आशंका बनी रहेगी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास का बड़ा धक्का लग सकता है।

**Original Title: ** चुनाव आयोग का ‘जादुई’ सॉफ्टवेयर: बिना अर्जी दिए ऐसा बदलेगा वोटर का ब्योरा कि वोट न दे पाए

**Original Content: ** आजकल कहा जाता है डिजिटल दुनिया में तकनीक ने इंसान की जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है। अब न बिजली का बिल भरने के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता है, और न ही बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं। सब कुछ मोबाइल के एक टच पर हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई सरकारी डिजिटल सिस्टम आपकी मर्जी के बिना ही वोटर लिस्ट में आपके नाम समेत पूरी जन्मकुंडली ही बदल डाले? जी हां, उत्तराखंड और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से इन दिनों कुछ ऐसे ही सनसनीखेज और अजीबोगरीब मामले सामने आए हैं। चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम में चल रहे इस ‘तकनीकी चमत्कार’ को देखकर लोग हैरान भी हैं और परेशान भी! … (rest of original omitted)

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।