चुनाव के मौसम के आगमन के साथ ही हर क्षेत्र में अपने‑अपने मुद्दों पर आवाज़ उठाने के लिए शिक्षकों ने सोशल‑मीडिया को अपना नया हथियार बना लिया है। परंतु 24 अक्टूबर 2026 को जारी माध्यमिक शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, उत्तराखंड सरकार ने इस प्रवृत्ति पर सख्त रोक लगा दी है। निदेशक‑जनरल विनोद प्रसाद सिम्ल्टी के नाम से जारी इस निर्देश में कहा गया है कि शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा सोशल‑मीडिया तथा प्रिंट‑मीडिया पर की गई अनर्गल टिप्पणियाँ “उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली‑2002” के नियम‑3(1), नियम‑3(2) और नियम‑7 का स्पष्ट उल्लंघन हैं।
विभाग ने गढ़वाल और कुमाऊँ मंडल के अपर निदेशकों को यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी की पोस्ट या कमेंट से यदि “असहजता” या “गड़बड़” का आभास होता है तो तुरंत सबूत जुटाकर कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया जाए। यह कोई पहली बार नहीं है; फरवरी 2026 में भी इसी विषय पर एक पत्र जारी किया गया था। लेकिन चुनावी माहौल के गर्म होने के साथ ही विभाग ने इस पर और भी कड़ा चाबुक चलाया है।
उल्लंघन करने वाले शिक्षकों के लिए “राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली‑2002” के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है, और लापरवाही की गंभीरता के अनुसार निलंबन (सस्पेंशन) तक की सज़ा हो सकती है। नियुक्ति प्राधिकारी को सीधे जांच‑रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
चुनाव के दौरान शिक्षकों के संगठन अक्सर ट्रांसफर नीति, पदोन्नति, पुरानी पेंशन योजना (OPS) और रिक्त पदों को भरने जैसे मुद्दों पर सड़क‑समीकरण और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर मोर्चा खोलते हैं। परंतु इस नए आदेश के बाद उन्हें अपनी आवाज़ बुलंद करने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। अब शिक्षकों को “पोस्ट” या “कमेंट” करने से पहले दस बार सोचने की ज़रूरत पड़ेगी, ताकि वे विभाग और सरकार की छवि को धूमिल न कर सकें।
Original Title: मास्टरजी की ‘लाइक-शेयर’ पर लगा ब्रेक! सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ लिखा तो नपेंगे गुरुजी
Original Content: चुनावी मौसम आते ही हर कोई अपने-अपने हक की आवाज उठाने लगता है। बैनर, पोस्टर, रैलियां और रैलियों से ज्यादा आज का नया हथियार बन चुका है—‘सोशल मीडिया’। जी हां, फेसबुक पर तीखी टिप्पणी, वॉट्सऐप ग्रुप्स में मैसेज की बरसात और एक्स (ट्विटर) पर सरकार को घेरने की तैयारी! लेकिन ठहरिए… अगर आप उत्तराखंड के सरकारी स्कूल में शिक्षक या कर्मचारी हैं और सोशल मीडिया पर अपनी ‘भड़ास’ निकालने की सोच रहे हैं, तो जरा संभल जाइए। विभाग ने आपकी उंगलियों पर लगाम कसने का पूरा पक्का इंतजाम कर लिया है। शिक्षकों की समस्याएं हल होंगी या नहीं, उनकी मांगें पूरी होंगी या फाइल में दबी रहेंगी—इस पर तो बहस बाद में होगी। लेकिन उससे पहले शिक्षा विभाग और सरकार को ‘असहज’ करने वाली पोस्ट्स और कमेंट्स पर कड़ा पहरा बिठा दिया गया है। …
